AIIMS Delhi Miracle: एम्स के डॉक्टरों का कमाल! महिला के गर्भाशय से निकाला 21.8 किलो का विशाल ट्यूमर, मौत के मुंह से खींच लाए जिंदगी

दिल्ली एम्स में महिला गर्भाशय का कैंसर से पीड़ित थी, उसके पेट से 21.8 किलोग्राम का ट्यूमर निकाला गया है.

Update: 2026-03-28 06:00 GMT

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ सर्जरी को सफल किया है. एक 46 साल की महिला, जो 'एडवांस्ड यूटेराइन सरकोमा' (गर्भाशय का कैंसर) से पीड़ित थी, उसके पेट से 21.8 किलोग्राम का वजनदार ट्यूमर निकाला गया है. ये काफी बड़ा चैलेंज था.

4 महीने से बढ़ रही थी तकलीफ

महिला दिल्ली की ही रहने वाली हैं, उन्हें पिछले चार महीनों से पेट में भारीपन महसूस हो रहा था. पिछले तीन महीनों में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पेट में बहुत सूजन, तेज दर्द और चलने-फिरने में असमर्थता होने लगी. जांच करने पर पता चला कि महिला को डायबिटीज और हाइपरटेंशन भी है, जिससे सर्जरी का खतरा और बढ़ गया था. लेकिन एम्स के डॉक्टरों ने ये कर दिखाया. सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एम डी रे ने देखा तो महिला की जांच की गई, तो पाया गया कि ट्यूमर का आकार लगभग 45 सेंटीमीटर था, जिसने पूरे पेट और पेल्विस हिस्से को घेर लिया था.

5 घंटे चली जटिल सर्जरी

यह बड़ा ट्यूमर किडनी और मूत्रनली (Ureters) जैसे जरूरी अंगों को दबा रहा था. डॉक्टरों के अनुसार, अगर समय पर सर्जरी न होती, तो एक-दो महीने में महिला की किडनी फेल हो सकती थी. ट्यूमर के दबाव के कारण महिला को सांस लेने में कठिनाई और पीठ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द हो रहा था. ये सर्जरी 5 घंटे चक तक चली. डॉक्टरों की टीम ने इस सर्जरी को सफल बनाया. सर्जरी के दौरान गर्भाशय, अंडाशय (Ovaries) और फैलोपियन ट्यूब के साथ उस बड़े ट्यूमर को शरीर से अलग किया गया.

डॉ. रे ने बताया कि इस ऑपरेशन में भारी रक्तस्राव (Hemorrhage) और शॉक का बड़ा खतरा था, लेकिन टीम की सूझबूझ से केवल 500 मिलीलीटर खून का नुकसान हुआ, जिसे समय रहते संभाल लिया गया. सर्जरी के अगले ही दिन चलने फिरने लगीं. इस सफल ऑपरेशन के बाद महिला की रिकवरी काफी कमाल की रही. आईसीयू में निगरानी के बाद वह अगले ही दिन अपने पैरों पर चलने लगी. एनेस्थेटिस्ट डॉ. राकेश गर्ग ने ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद की देखभाल को बखूबी संभाला.

डॉक्टरों का संदेश: डरें नहीं, सही जगह चुनें

डॉ. एम डी रे ने इस केस के जरिए कहा कि "ट्यूमर का आकार बड़ा होने का मतलब यह नहीं है कि उसका इलाज असंभव है या मरीज फाइनल स्टेज में है. एक्सपर्ट देखभाल और सही मेडिकल सेंटर के साथ ऐसे मामलों को प्रभावी ढंग से ठीक किया जा सकता है.

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