क्या आप भी रात 9 बजे के बाद खाते हैं खाना? AIIMS के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने बताया, लेट डिनर कर सेहत के साथ कर रहे हैं बड़ा खिलवाड़

देर रात को खाना खाने से शरीर ही मानसिक बीमारियां भी होती है, जो आपको पता नहीं चलती.

Update: 2026-04-01 07:15 GMT

जल्दी खाना खाने के फायदे तो कई लोगों ने आपको बता दिए हैं, लेकिन लेट से खाना खाने के क्या नुकसान हो सकते हैं ये भी आपको जरूर जानना चाहिए. डेली लाइफ में, रात का खाना अक्सर प्राथमिकता की लिस्ट में और नीचे चला जाता है. देर से होने वाली मीटिंग, सिर पर मंडराती डेडलाइन, या बस बाकी सारे काम पहले खत्म करने की जरूरत की वजह से इसमें देर हो जाती है. कई लोगों के लिए, यह एक बाद का विचार बन जाता है, जिसे देर रात, सोने से ठीक पहले खाया जाता है. लेकिन यह आदत, हालांकि आम है, शरीर के लिए उतनी ही खतरनाक. हमारी अंदरूनी घड़ी इस बात से गहराई से जुड़ी है कि हम कब खाते हैं, और उस लय को नज़रअंदाज़ करने से पाचन से लेकर नींद तक, हर चीज़ पर चुपचाप असर पड़ सकता है.

कैलिफोर्निया के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी, जिन्होंने AIIMS, हार्वर्ड और स्टैनफ़ोर्ड से ट्रेनिंग ली है, वह देर रात के खाने के असर को बताते हैं. डॉक्टर बता रहे हैं कि शाम को जल्दी खाने से ब्लड ग्लूकोज़ को बेहतर तरीके से कंट्रोल करने, हार्मोनल संतुलन को बढ़ावा देने और यहां तक कि नींद की कुल गुणवत्ता को बेहतर बनाने में कैसे मदद मिल सकती है. Instagram वीडियो में, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने बताया, “खाने के समय का साइंस बताता है कि रात के खाने का समय उतना ही मायने रखता है जितना कि खाने का चुनाव.

जब आप देर से खाते हैं तो क्या होता है?

डॉ. सेठी बताते हैं कि देर से खाने से आपके शरीर की लय पर इन तरीकों से असर पड़ता है. इंसुलिन संवेदनशीलता 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो जाती है. फैट बर्न होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. नींद के हार्मोन (मेलाटोनिन) पाचन में रुकावट डालते हैं. गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के अनुसार, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि देर से खाने से आपके शरीर को ऐसे समय में पाचन पर काम करते रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जब उसे स्वाभाविक रूप से आपकी सर्कैडियन लय (शरीर की जैविक घड़ी) के अनुसार आराम करना और खुद की मरम्मत करनी चाहिए. नतीजा ये होता है कि पाचन प्रक्रिया कम काम कर पाती है, जिससे अक्सर अगली सुबह पेट फूलना, बेचैनी और लगातार थकान महसूस होती है. डॉ. सेठी समझाते हैं, “ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब शरीर की मरम्मत और डिटॉक्स करने का समय होता है, तब भी वह पाचन का काम करता रहता है. इसीलिए आठ घंटे की नींद के बाद भी आप भारीपन, पेट फूला हुआ या थका हुआ महसूस करते हुए जागते हैं.

जल्दी खाने के फायदे

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ऐसे शोध की ओर इशारा करते हैं जिससे पता चलता है कि जिन लोगों ने शाम 7 बजे से पहले रात का खाना खाया, उन्हें ये खास फ़ायदे मिले, भले ही उनकी कैलोरी की मात्रा एक जैसी थी.

रात के समय ग्लूकोज़ का स्तर 15 प्रतिशत कम रहा. इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर हुई. नींद की गुणवत्ता में सुधार हुआ. डॉक्टर बताते हैं कि यह इस तरह होता है. सूरज डूबने के बाद, मेलाटोनिन का लेवल स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है और इंसुलिन का स्राव कमज़ोर पड़ जाता है. इससे नींद खराब हो सकती है और रात भर शरीर में ज़्यादा फैट जमा हो सकता है.” सिर्फ़ 2.5 घंटे का फर्क भी काफ़ी असर डाल सकता है. डॉ. सेठी बताते हैं कि रात 7 बजे के आस-पास खाना खाने से ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहता है और नींद भी अच्छी आती है. इसके उलट, रात का खाना 9:30 बजे तक टालने से ब्लड शुगर में अचानक तेज़ी आती है और रात में शरीर की मरम्मत की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे अगले दिन आपको आराम महसूस नहीं होता.

मेटाबॉलिक बीमारियों वाले लोगों के लिए

डॉ. सेठी बताते हैं कि खाना खाने के बाद ब्लड शुगर में अचानक तेज़ी (स्पाइक्स) उन लोगों में ज़्यादा देखने को मिलती है जिन्हें मेटाबॉलिक बीमारियां हैं, जैसे कि डायबिटीज़, प्री-डायबिटीज़ और फैटी लिवर की बीमारी. इसके उलट, शाम को जल्दी खाना खाने से ग्लूकोज़ बेहतर तरीके से कंट्रोल होता है और हार्मोन भी ज़्यादा संतुलित रहते हैं. ये दोनों ही बातें इन बीमारियों को असरदार तरीके से मैनेज करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं.

वे समझाते हैं, “जिन लोगों को डायबिटीज़, प्री-डायबिटीज़ या फैटी लिवर की समस्या है, उनमें रात का खाना खाने के बाद शुगर का लेवल अक्सर 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है और कभी-कभी तो इंसुलिन रेजिस्टेंस के आधार पर यह और भी ज़्यादा हो सकता है. यही वजह है कि रात का खाना जल्दी खाने से हार्मोन और शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है, जो कि प्री-डायबिटीज़, डायबिटीज़ और फैटी लिवर के मरीजों के लिए बहुत जरूरी है. आपको कोई बहुत ज़्यादा सख़्त लाइफ़स्टाइल अपनाने की जरूरत नहीं है. आपको बस अपने शरीर की बनावट और जरूरत के हिसाब से खाना खाना चाहिए.

input IANS

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