दिल्ली के RML अस्पताल में 'ग्लोबल फर्स्ट' हार्ट सर्जरी, सीना चीरे बिना ठीक किया उल्टा दिल, जानें क्या है 'साइटस इन्वर्सस'

डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है.

Update: 2026-04-04 05:30 GMT

मेडिकल साइंस में एक और उपलब्धि हासिल हुई है. डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के डॉक्टरों ने एक ऐसा सफल ऑपरेशन किया है जिसके बारे में सुनकर आप हैरान हो जाएंगे. डॉक्टरों की एक टीम ने ऐसी महिला का सफल ऑपरेशन किया है, जिसके शरीर के सभी अंग सामान्य इंसान की तुलना में 'मिरर इमेज' यानी उल्टी तरफ थे. इसे मेडिकल भाषा में साइटस इन्वर्सस टोटालिस' (Situs Inversus Totalis) कहते हैं. डॉ. नरेंद्र सिंह झाझरिया (निदेशक प्रोफेसर और एचओडी) के नेतृत्व में टीम ने एक 31 वर्षीय महिला की अत्यंत जटिल हार्ट सर्जरी कर 'ग्लोबल फर्स्ट' (दुनिया में पहली बार) होने का गौरव हासिल किया है.

क्या थी मरीज की स्थिति?

31 वर्षीय रामबाई एक जन्मजात हार्ट की बीमारी (Congenital Heart Disease) से पीड़ित थीं. उनकी स्थिति बेहद दुर्लभ थी. उनका दिल दाईं ओर (Dextrocardia) था. लिवर बाईं ओर, तिल्ली (Spleen) दाईं ओर और पेट भी दाईं ओर था. उन्हें 'पार्शियल एट्रियोवेंट्रिकुलर कैनाल डिफेक्ट' था, जिसमें दिल के बीच के हिस्सों में छेद होता है.

दुनिया में पहली बार: बिना सीना चीरे सफल सर्जरी

आमतौर पर ऐसी जटिल सर्जरी के लिए सीने की हड्डी (Chest Bone) को काटना पड़ता है, लेकिन डॉ. नरेंद्र सिंह झाझरिया और उनकी टीम ने इसे मात्र 4 सेंटीमीटर के छोटे से कॉस्मेटिक कट (Left Inframmary Incision) के जरिए इस काम को सफलतापूर्वक किया.

मरीज के अपने ही पेरीकार्डियम (दिल की झिल्ली) से पैच बनाकर छेद को भरा गया. दिल के वाल्व और इलेक्ट्रिक कंडक्शन बंडल को नुकसान पहुंचाए बिना इतनी बारीकी से टांके लगाना उच्च स्तर के कौशल की मांग करता है. डॉ. जसविंदर कौर कोहली और उनकी टीम ने इस जटिल प्रक्रिया के दौरान मरीज की मॉनिटरिंग और एनेस्थीसिया का बखूबी मैनेज किया.

आयुष्मान भारत योजना का मिला सहारा

यह चुनौतीपूर्ण सर्जरी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY - Ayushman Bharat) के तहत पूरी तरह फ्री की गई. मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और डिस्चार्ज के लिए तैयार है. इकोकार्डियोग्राफी रिपोर्ट ने सर्जरी की सफलता की पुष्टि की है. संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार ने इस सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी. बता दें कि डॉ. आरएमएल अस्पताल का कार्डियक सर्जरी विभाग पहले भी इतिहास रच चुका है. अगस्त 2022 में इसी विभाग ने केंद्र सरकार के अस्पताल में पहला हार्ट ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया था.

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