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वेरिकोस वेन्स में रक्तस्राव – एक गंभीर लेकिन अनदेखी समस्या

वेरिकोस वेन्स (Varicose veins) यानी टांगों में उभरी, चौड़ी, मुड़ी-तुड़ी सतही नसें — केवल एक “कॉस्मेटिक समस्या” नहीं हैं। यह दरअसल नसों की दीवारों और वॉल्व की लंबी अवधि की कमज़ोरी का संकेत हैं। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में वेरिकोस वेन्स लगभग 2-3 गुना अधिक देखी जाती हैं।
वेरिकोस वेन्स में रक्तस्राव क्या है?
वेरिकोस वेन्स (Varicose veins) ऐसी नसें हैं जो बड़ी, सूजी हुई या मुड़ी-तुड़ी दिखाई देती हैं। यह त्वचा के ठीक नीचे सतह पर दिखती हैं। सामान्यतः नसों में मौजूद वाल्व रक्त को दिल की ओर धकेलते हैं। परंतु जब ये वाल्व कमजोर या खराब हो जाते हैं, तब रक्त विपरीत दिशा में वापस बहने लगता है। यह बैक-प्रेशर नसों को और अधिक फैला देता है — और यही स्थिति बाद में रक्तस्राव की गंभीर समस्या तक पहुँच सकती है।
वेरिकोस वेन्स में रक्तस्राव क्यों ख़तरनाक है?
सामान्य नसों में दबाव कम होता है। वेरिकोस वेन्स में दबाव कई गुना अधिक होता है। इसलिए यदि इनमें छोटी सी भी चोट आए — रक्त बहुत तेज़ी से निकल सकता है। वरिष्ठ नागरिकों, मधुमेह वालों और पतली त्वचा वाले रोगियों में तो यह रक्तस्राव अत्यधिक और जीवन-घातक भी हो सकता है।
रक्तस्राव का क्या कारण है?
वेरिकोस वेन्स कभी-कभी बिना किसी चोट के भी फट सकती हैं और खून बह सकता है। ऐसा दो तरह से हो सकता है:
• त्वचा पर बाहर – कोई छोटी सी चोट, कट, खरोंच लगने पर रक्तस्राव तुरंत दिख सकता है।
• त्वचा के अंदर – कोई टक्कर, गिरना या हल्का झटका भी अंदरुनी ब्लीडिंग कर सकता है, जिससे बाद में त्वचा पर गहरे नीले दाग और सूजन दिखाई देती है।
किन कारणों से बढ़ता है वेरिकोस वेन्स में रक्तस्राव का जोखिम?
कई शारीरिक स्थितियाँ और जीवनशैली से जुड़े कारण वेरिकोस वेन्स में रक्तस्राव के जोखिम को काफी बढ़ा सकते हैं, जैसे:
• नसों की दीवारें पतली और कमजोर हो जाना
• लगातार खड़े रहने वाले पेशे (शिक्षक, दुकानदार, हेयर ड्रेसर इत्यादि)
• गर्भावस्था या हाल ही में प्रसव होना
• मोटापा
• हार्मोनल गोलियाँ (बर्थ कंट्रोल)
• पुराने डीप वेन थ्रम्बोसिस (DVT
• पारिवारिक इतिहास
लक्षण कैसे पहचानें?
यदि रक्तस्राव त्वचा के अंदर हो रहा है, तो रोगी को निम्न संकेत दिख सकते हैं:
• त्वचा पर नीला/बैंगनी फैलता हुआ धब्बा
• टांगों में भारीपन, जलन, ऐंठन और थकावट
• लंबे समय तक खड़े रहने पर दर्द बढ़ना
• सूखी त्वचा और जलन
• चक्कर या बेहोश जैसा महसूस होना (कभी-कभी)
• यदि त्वचा पतली और चमकीली हो जाए — यह “प्रि-ब्लीडिंग वॉर्निंग साइन” माना जाता है।
रोग की पहचान / जांच कैसे होती है?
डॉक्टर सबसे पहले रोगी के लक्षण, इतिहास और टांगों की नसों की दिखाई देने वाली स्थिति को देखकर प्रारम्भिक आकलन कर लेते हैं। लेकिन यह समझने के लिए कि समस्या कितनी गंभीर है और किस स्तर पर है — कुछ विशेष जांचें की जाती हैं:
• वेनस क्लिनिकल एग्ज़ामिनेशन — टांगों की नसों, सूजन, त्वचा में बदलाव की बारीक जाँच
• वेनस डॉप्लर अल्ट्रासाउंड — नसों में रक्त प्रवाह और वाल्व की स्थिति को देखने की मुख्य जाँच
• CEAP क्लासिफिकेशन — इसके आधार पर रोग की “स्टेजिंग” की जाती है ताकि उपचार का सही प्लान बनाया जा सके
इन जांचों के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि समस्या सतही नसों तक सीमित है, या डीप सिस्टम / पर्फ़ोरेटर वेन्स भी प्रभावित हैं। इससे उपचार की दिशा और तरीका तय करने में सबसे अधिक मदद मिलती है।
इसका इलाज क्या है?
वेरिकोस वेन्स के उपचार का उद्देश्य दो चीज़ें है: तुरंत नुकसान से बचाना और लंबे समय में नसों के दबाव को कम करना।
1) शुरुआती और घरेलू स्तर पर अपनाए जाने वाले उपाय
• खून बह रहा हो तो तुरंत साफ कपड़े / बैंडेज से दबाव दें
• सूजन कम करने और नसों को सपोर्ट देने के लिए कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनें
• दिन में कई बार टांगों को दिल से ऊपर उठाकर रखें — यह वीनस प्रेशर को कम करता है
• धूम्रपान और शराब से बचें, क्योंकि ये रक्त प्रवाह को खराब करते हैं
• अपने वजन को नियंत्रण में रखें
• नियमित वॉक और एंकल पम्प व्यायाम करें — इससे टांगों की पंपिंग क्षमता बढ़ती है
• त्वचा को मॉइश्चराइज रखें ताकि त्वचा पतली/सूखी न हो
यदि बाहर से कट लग जाए और खून बहने लगे तो तुरंत प्रेशर देना चाहिए।
2) चिकित्सक द्वारा किया जाने वाला उपचार
जब रूढ़िवादी (Conservative) उपाय पर्याप्त न हों, या नसें बहुत ज्यादा खराब हो चुकी हों, तब डॉक्टर मिनिमली इन्वेसिव तकनीकें सुझा सकते हैं, जैसे—
• वेन स्ट्रिपिंग
• लेज़र एब्लेशन
• रेडियोफ्रीक्वेंसी क्लोज़र
• स्क्लेरोथैरपी
ये सभी प्रक्रियाएँ नस को बंद करने या नष्ट करने पर आधारित हैं, ताकि गलत दिशा में बहने वाले रक्त को रोका जा सके।
कौन-सी सावधानियाँ जरूरी हैं?
वेरिकोस वेन्स के रोगियों को अपनी रोज़मर्रा की आदतों में कुछ छोटे-छोटे बदलाव ज़रूर अपनाने चाहिए, ताकि नसों पर दबाव न बढ़े और त्वचा सुरक्षित रहे:
• बहुत देर तक लगातार खड़े न रहें — बीच-बीच में चलें या थोड़ा बैठकर पैर आराम दें
• हाई हील, बहुत तंग कपड़े या कसने वाले गारमेंट्स से बचें — ये रक्त प्रवाह को बाधित करते हैं
• शेविंग, वैक्सिंग या गार्डनिंग करते समय सावधानी रखें — नसें सतह के पास होती हैं, चोट का जोखिम ज्यादा है
• हर दिन पैरों की त्वचा का निरीक्षण करें — सूखापन, कट, खरोंच, रंग बदलना या नए दाग दिखाई दें तो तुरंत नोटिस करें
इन छोटी-छोटी सावधानियों से भविष्य के जोखिम कम होते हैं और जटिलताओं को टाला जा सकता है।
डॉक्टर से कब तुरंत परामर्श लेना चाहिए?
यदि वेरिकोस वेन्स वाले क्षेत्र में निम्न संकेत दिखें, तो इन्हें हल्का न समझें — यह जटिलता का संकेत हो सकता है:
• बार-बार तेज दर्द, गर्माहट या लालिमा महसूस होना
• टांगों में नई सूजन या कोई नया घाव बनना
• पहले से मौजूद घाव का आकार बढ़ना या उसमें बदबूदार पीला रिसाव आना
• बार-बार या लगातार तेज बुखार रहना
ऐसी स्थिति में बिना देरी, डॉक्टर से तुरंत मुलाकात करना आवश्यक है
कब समझे कि स्थिति गंभीर है? (Medical Emergency)
अगर निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो यह मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है और तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए:
• टांग या पैर का रंग नीला या काला पड़ने लगे
• सांस लेने में कठिनाई या सीने में दर्द महसूस हो
• टांगों में अचानक असहनीय तेज दर्द उठना
• खून का बहना रुक ही नहीं रहा हो
इन परिस्थितियों में समय गंवाना खतरनाक हो सकता है — तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लेना अनिवार्य है।
जागरूकता ही सुरक्षा है
वेरिकोस वेन्स केवल “सौंदर्य की समस्या” नहीं, बल्कि एक उपेक्षित रक्त प्रवाह विकार है, जो धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह साधारण सूजन से बढ़कर गंभीर रक्तस्राव, अल्सर, इंफेक्शन और इमरजेंसी तक पहुँच सकता है।अत: लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर विशेषज्ञ सलाह लें, नियमित निगरानी रखें और जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन अपनाएँ।
समझदारी, प्रारंभिक पहचान और समय पर उपचार ही वेरिकोस वेन्स से भविष्य की जटिलताओं को रोकने का सबसे सुरक्षित मार्ग है।
National Institute for Health and Care Excellence (NICE), UK.
Varicose veins: diagnosis and management (Clinical guideline CG168).
https://www.nice.org.uk/guidance/cg168
Society for Vascular Surgery & American Venous Forum.
The management of chronic venous disease guidelines.
Journal of Vascular Surgery: Venous and Lymphatic Disorders. 2022 Update.
American Venous Forum (AVF).
Bleeding from Varicose Veins: risks and emergency advice.
(AVF Patient Education Factsheet)
Klabunde RE. Cardiovascular Physiology Concepts — Venous Pressure and Venous Blood Flow.
Lippincott Williams & Wilkins.
International Union of Phlebology (UIP).
CEAP Classification of Chronic Venous Disorders (2020 Revision).
Dr Prem Aggarwal, (MD Medicine, DNB Cardiology) is a Cardiologist by profession and also the Co-founder of Medical Dialogues. He is the Chairman of Sanjeevan Hospital in Central Delhi and also serving as the member of Delhi Medical Council

