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जब शुगर दिल पर असर डालती है: मधुमेह और हृदय रोग का गहरा संबंध

डायबिटीज़ (मधुमेह) और दिल की बीमारी का रिश्ता बहुत गहरा और ख़तरनाक है।
बढ़ी हुई शुगर न केवल शरीर को कमज़ोर करती है, बल्कि धीरे-धीरे दिल की नसों और मांसपेशियों को भी नुकसान पहुँचाती है।
CDC के अनुसार, जिन लोगों को डायबिटीज़ है, उनमें दिल की बीमारी या स्ट्रोक का खतरा दोगुना होता है।
कई बार यही दिल की समस्या मधुमेह से मौत का सबसे बड़ा कारण बन जाती हैं।
क्या होता है डायबिटिक दिल
जब खून में शुगर का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है,
तो यह रक्त वाहिकाओं की भीतरी परत को नुकसान पहुँचाता है।
इससे कोलेस्ट्रॉल और फैट जमने लगता है — जिसे Atherosclerosis कहा जाता है।
धीरे-धीरे धमनियाँ संकरी हो जाती हैं, और दिल तक ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है।
इसका असर इन बीमारियों के रूप में दिखता है:
• Coronary Artery Disease (दिल की नसों में ब्लॉकेज)
• Heart Attack (दिल का दौरा)
• Heart Failure (दिल की कार्यक्षमता में कमी)
• Stroke (फालिज या मस्तिष्काघात)
Johns Hopkins Medicine के अनुसार,
डायबिटीज़ के दो-तिहाई रोगी दिल की बीमारी से प्रभावित होते हैं।
ऐसा क्यों होता है
लगातार बढ़ी हुई शुगर दिल को कई तरीक़ों से प्रभावित करती है:
• रक्त वाहिकाओं की दीवारें कमज़ोर होती हैं
• LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड बढ़ते हैं, जबकि HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) घटता है
• ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे दिल पर दबाव बढ़ता है
• सूजन (Inflammation) और ऑक्सीडेटिव तनाव (Oxidative Stress) बढ़ता है
• दिल की मांसपेशियाँ कठोर हो जाती हैं — जिसे Diabetic Cardiomyopathy कहा जाता है
Framingham Heart Study के अनुसार,
डायबिटीज़ से पीड़ित महिलाएँ, पुरुषों की तुलना में दो से तीन गुना ज़्यादा हार्ट फेलियर (Heart Failure) का शिकार होती हैं।
कब बनता है खतरनाक
डायबिटीज़ का सबसे गंभीर असर तब होता है जब यह दिल की मांसपेशियों को सीधे नुकसान पहुँचाता है।
इसे Diabetic Cardiomyopathy कहा जाता है, जिसमें धमनियों में ब्लॉकेज न होने पर भी दिल कमजोर होने लगता है।
शोध बताते हैं कि —
• 26% डायबिटिक मरीज़ों में दिल की कार्यक्षमता घटने लगती है
• डायबिटीज़ वाले व्यक्तियों में हार्ट फेलियर का खतरा दोगुना होता है
• फ्री रैडिकल्स और माइटोकॉन्ड्रिया की गड़बड़ी दिल की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती है
कैसे प्रभावित होता है दिल की कोशिकाओं का संतुलन (Autophagy)
नई रिसर्च के अनुसार, डायबिटीज़ में दिल की कोशिकाओं का Autophagy यानी “कोशिकीय सफाई और मरम्मत” की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।
जब यह प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, तो खराब प्रोटीन और सेल वेस्ट जमा होने लगते हैं,
जिससे दिल की कोशिकाएँ कमजोर पड़ जाती हैं।
कुछ महत्वपूर्ण प्रोटीन जैसे AMPK, SIRT1/3 और FOXO इस प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं,
और इन्हें भविष्य में नई दवाओं और उपचारों के लिए लक्षित (Target) किया जा सकता है।
हालाँकि विशेषज्ञ मानते हैं कि शुरुआती और अंतिम चरणों में यह प्रक्रिया अलग-अलग असर डालती है,
इसलिए इसका संतुलन बनाना बेहद ज़रूरी है।
कौन लोग ज़्यादा जोखिम में हैं
किसे है अधिक खतरा-
• टाइप 2 डायबिटीज़ या कई सालों से अनियंत्रित शुगर वाले लोग
• मोटापा या बैठे-बैठे जीवनशैली
• उच्च रक्तचाप या कोलेस्ट्रॉल वाले
• धूम्रपान या अत्यधिक शराब सेवन करने वाले
• परिवार में हृदय रोग का इतिहास
• तनाव, अवसाद या नींद की कमी से ग्रस्त लोग
क्या हो सकते हैं लक्षण
डायबिटिक दिल की बीमारी कई बार चुपचाप बढ़ती है — बिना स्पष्ट दर्द या चेतावनी के।
आम लक्षणों में शामिल हैं:
• सीने में दबाव या भारीपन
• थकान और सांस फूलना
• पैरों या टखनों में सूजन
• दिल की धड़कन तेज़ या अनियमित होना
• चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना
डायबिटिक न्यूरोपैथी (Nerve Damage) की वजह से कई बार हार्ट अटैक का दर्द महसूस ही नहीं होता,
इसलिए नियमित जांच बेहद ज़रूरी है।
कैसे की जाती है पुष्टि
डॉक्टर दिल की स्थिति जानने के लिए ये जांचें करते हैं:
• ECG / ECHO – दिल की धड़कन और पंपिंग क्षमता
• Lipid Profile – कोलेस्ट्रॉल की जाँच
• HbA1c Test – पिछले 3 महीनों की औसत शुगर का पता
• TMT या Angiography – ब्लॉकेज की पहचान के लिए
• Cardiac MRI – विशेष मामलों में दिल की मांसपेशियों की जाँच
क्या है उपचार
डायबिटीज़ और दिल — दोनों का इलाज एक साथ और संतुलित तरीके से करना ज़रूरी है।
• डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाएँ जो शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें
• जीवनशैली में बदलाव: पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और तनाव नियंत्रण
• नियमित जांचें: ECG, ECHO, और ब्लड टेस्ट
• ज़रूरत पड़ने पर Cardiac Rehabilitation यानी हृदय पुनर्वास
AHA के अनुसार,
अगर डायबिटीज़ सही तरह से नियंत्रित की जाए, तो दिल की बीमारी का खतरा 40–42% तक कम हो सकता है।
क्या ध्यान रखना है जरूरी
इन चीज़ो को ध्यान में रखे
• HbA1c स्तर 7% से नीचे रखें (या डॉक्टर की सलाह के अनुसार)
• ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल नियमित रूप से जाँचें
• 30 मिनट व्यायाम, सप्ताह में कम से कम 5 दिन
• धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखें
• तनाव कम करें और 7–8 घंटे नींद लें
कब डॉक्टर से संपर्क करना है जरूरी
अगर आपको लगातार या बार-बार ये लक्षण महसूस हों —
• सीने में दर्द या दबाव
• सांस फूलना या थकान
• पैरों में सूजन
• धड़कन का तेज़ या असामान्य होना
तो तुरंत डॉक्टर या कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
याद रखिए
डायबिटीज़ केवल शुगर बढ़ाती नहीं — यह दिल की धड़कन तक को कमजोर कर सकती है।
बढ़ी हुई शुगर से नसें सख़्त होती हैं, दिल की मांसपेशियाँ थकती हैं और
धीरे-धीरे दिल की कार्यक्षमता कम होती जाती है।
शुगर को संभालिए, दिल को बचाइए — क्योंकि डायबिटीज़ और दिल मिलकर बन सकते हैं आपकी सेहत के लिए ख़तरनाक ।
National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK). Diabetes and Your Heart. U.S. Department of Health and Human Services, 2024.
Centers for Disease Control and Prevention (CDC). Diabetes and Heart Disease. Updated 2024.
American Heart Association (AHA). Cardiovascular Disease and Diabetes — The Connection. Updated 2024.
Johns Hopkins Medicine. Diabetes and Heart Disease: How They’re Linked. Reviewed 2023.
World Health Organization (WHO). Diabetes and Cardiovascular Complications: Key Facts. 2024.
Jia G. et al. Diabetic Cardiomyopathy: An Update of Mechanisms and Therapeutic Targets. Circulation Research. 2018.
Dr Prem Aggarwal, (MD Medicine, DNB Cardiology) is a Cardiologist by profession and also the Co-founder of Medical Dialogues. He is the Chairman of Sanjeevan Hospital in Central Delhi and also serving as the member of Delhi Medical Council

