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महिलाओं में हृदय रोग: अलग लक्षण, अलग जोखिम

दुनियाभर में महिलाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण हृदय रोग (Heart Disease) है।
CDC के अनुसार, हर चार महिलाओं में से एक की मृत्यु हृदय रोग से होती है,
और करीब 60 मिलियन महिलाएँ किसी न किसी प्रकार की हृदय समस्या से प्रभावित हैं।
इसके बावजूद, महिलाओं में इसके लक्षण, पहचान और इलाज को लेकर जागरूकता अब भी बहुत कम है।
क्या महिलाओं में हृदय रोग अलग होता है?
महिलाओं का दिल सिर्फ आकार में छोटा नहीं होता, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली भी अलग होती है।
महिलाओं में अक्सर Microvascular Disease यानी दिल की छोटी रक्त वाहिकाओं की बीमारी होती है,
जिसमें बड़ी धमनियों में ब्लॉकेज न होते हुए भी दिल तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है।
एस्ट्रोजन (Estrogen) नामक हार्मोन दिल की रक्षा करता है,
लेकिन रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद यह सुरक्षा घटने लगती है।
WHO के अनुसार, हर साल 8.5 मिलियन महिलाओं की मृत्यु हृदय रोगों के कारण होती है —जो कैंसर से कहीं अधिक है।
क्यों होता है महिलाओं में हृदय रोग
महिलाओं में हृदय रोग के कई प्रमुख कारण होते हैं:
• हार्मोनल बदलाव: रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है।
• गर्भावस्था की जटिलताएँ: जैसे हाई ब्लड प्रेशर या गर्भकालीन डायबिटीज़।
• ऑटोइम्यून बीमारियाँ: जैसे लूपस और रूमेटॉइड आर्थराइटिस।
• तनाव और नींद की कमी।
• धूम्रपान, जंक फूड और निष्क्रिय जीवनशैली।
• वंशानुगत कारण (Family History) — परिवार में दिल की बीमारी होने पर जोखिम बढ़ जाता है।
कब बनता है खतरनाक
हृदय रोग तब खतरनाक बनता है जब लक्षणों की पहचान देर से होती है।
महिलाएँ अक्सर सीने के दर्द को गैस या थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर देती हैं,
जिससे उपचार में देरी होती है और दिल की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान हो सकता है।
SWEDEHEART अध्ययन (2003–2013) के अनुसार,
महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम दवाएँ, कम जांचें और कम पुनर्वास (Rehabilitation) मिलते हैं,
जिससे मृत्यु दर अधिक पाई गई।
जब दोनों को समान इलाज दिया गया, तो यह अंतर लगभग समाप्त हो गया।
कौन सी महिलाएँ ज़्यादा जोखिम में हैं
इन महिलाओं को अधिक खतरा रहता है-
• 40 वर्ष से ऊपर की महिलाएँ
• डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर वाली महिलाएँ
• धूम्रपान करने वाली
• मोटापा और कम शारीरिक गतिविधि वाली
• रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद की महिलाएँ
• गर्भावस्था में हाई BP या डायबिटीज़ झेल चुकी महिलाएँ
• परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास रखने वाली महिलाएँ
AHA रिपोर्ट (2020) के अनुसार,
40 वर्ष की महिला के लिए जीवनभर हृदय रोग विकसित होने का खतरा हर दो में से एक है।
लक्षण क्या हो सकते हैं
महिलाओं में हृदय रोग के लक्षण अक्सर पुरुषों से अलग और हल्के होते हैं:
• अत्यधिक थकान या कमजोरी
• जबड़े, गर्दन, पीठ या कंधे में दर्द
• सांस फूलना या सीने में दबाव
• उल्टी या चक्कर आना
• घबराहट या अपच जैसा महसूस होना
महिलाओं में Silent Heart Attack यानी बिना तेज़ दर्द वाला दिल का दौरा ज़्यादा देखा गया है।
कैसे पहचानें
अगर आपको बार-बार थकान, चक्कर या सांस फूलने की शिकायत होती है,
या जबड़े या पीठ में दर्द बार-बार महसूस होता है,
तो इसे “सिर्फ गैस” या “तनाव” समझकर नज़रअंदाज़ न करें।
यह आपके दिल से आने वाला संकेत हो सकता है।
समय पर ECG, ECHO या TMT जांच कराना जरूरी है,
क्योंकि शुरुआती पहचान से गंभीर नुकसान रोका जा सकता है।
कैसे की जाती है पुष्टि
हृदय रोग की पुष्टि के लिए डॉक्टर निम्नलिखित जांचें करते हैं:
• ECG (Electrocardiogram) — दिल की विद्युत गतिविधि की जांच
• Echocardiogram (ECHO) — दिल की पंपिंग और संरचना देखने के लिए
• Treadmill Test (TMT) — चलने पर दिल की क्षमता जांचने के लिए
• Angiography — धमनियों में ब्लॉकेज पता लगाने के लिए
• Blood Tests — जैसे Troponin, Cholesterol, HbA1c
क्या है उपचार
महिलाओं के लिए उपचार पुरुषों जैसा ही प्रभावी है,
लेकिन यह तभी सफल होता है जब समय पर किया जाए।
• जीवनशैली में सुधार: हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण
• Cardiac Rehabilitation: दिल को दोबारा मज़बूत करने की थेरेपी
• ज़रूरत पड़ने पर Angioplasty या Bypass Surgery भी की जा सकती है।
• डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाएँ.
80% तक हृदय रोगों को समय पर जीवनशैली सुधार से रोका जा सकता है।
क्या ध्यान रखना है जरूरी
इन बातों को ध्यान में रखना है ज़रुरी-
• रोज़ाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें
• धूम्रपान और शराब से दूर रहें
• पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन करें
• नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएँ
• किसी भी असामान्य लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें
कब डॉक्टर से संपर्क करना है जरूरी
अगर आपको लगातार या बार-बार ये लक्षण महसूस हों —
• सांस लेने में दिक्कत
• जबड़े या पीठ में दर्द
• अचानक सीने में तेज़ दर्द या भारीपन
• अत्यधिक पसीना, मतली या उल्टी
• बोलने में कठिनाई या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी
• बेहोशी या ब्लैकआउट
ये हार्ट अटैक या स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं।
ऐसे में तुरंत 108 या नज़दीकी अस्पताल पहुँचे और कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
जागरुक्ता ही सुरक्षा है
महिलाओं में हृदय रोग अक्सर धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ता है।
थकान, सांस फूलना या जबड़े में दर्द — ये मामूली नहीं, दिल के खतरे के संकेत हो सकते हैं।
समय पर पहचान, जांच और उपचार ही सच्ची सुरक्षा है।
American Heart Association (AHA). Heart Disease in Women — Warning Signs and Prevention. Updated 2024.
Centers for Disease Control and Prevention (CDC). Women and Heart Disease: Key Facts. Updated 2024.
Mayo Clinic. Heart Disease in Women: Understanding the Symptoms and Risks. Reviewed 2024.
Cleveland Clinic. Women and Cardiovascular Disease: What You Need to Know. Updated 2023.
World Heart Federation (WHF). Women and Cardiovascular Disease — Bridging the Gap. 2024.
European Society of Cardiology (ESC). Cardiovascular Disease Prevention in Women: 2023 Guidelines. Eur Heart J. 2023.
Dr Prem Aggarwal, (MD Medicine, DNB Cardiology) is a Cardiologist by profession and also the Co-founder of Medical Dialogues. He is the Chairman of Sanjeevan Hospital in Central Delhi and also serving as the member of Delhi Medical Council

