Prostate Cancer Diagnosis: प्रोस्टेट कैंसर की पहचान में AI का कमाल, क्लीवलैंड क्लिनिक के रिसर्च आपको कर देगी हैरान
AI की मदद से गंभीर बीमारियों का इलाज संभव हो रहा है. प्रोस्टेट कैंसर की पहचान में AI का अहम रोल होगा. जानिए कैसे.
AI ने केवल आपके काम को आसान करेगा, बल्कि हेल्थ सेक्टर में एक क्रांति की तरह सामने आ रहा है. गंभीर बीमारियों के लिए AI का इस्तेमाल कर बीमारियों को ठीक किया जा रहा है. इसी बीच एक और अच्छी खबर आई है. प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक गंभीर रोग है, लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इसे मात देने के लिए तैयार है. अमेरिका के मशहूर क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के रिसर्चर एक नए AI सॉफ्टवेयर का परीक्षण कर रहे हैं, जो MRI स्कैन के जरिए प्रोस्टेट कैंसर की पहचान को अधिक सटीक और तेज बना सकता है.
AI रेड कंपैनियन (AIRC): कैंसर का नया दुश्मन
सीमेंस हेल्थीनियर्स द्वारा विकसित इस तकनीक को AIRC प्रोस्टेट MRI कहा जाता है, जिसे 2025 में FDA की मंजूरी मिली थी. यह सॉफ्टवेयर MRI इमेज में संदिग्ध घावों (Lesions) की पहचान करता है, जिससे डॉक्टरों को बायोप्सी और इलाज के निर्णय लेने में बड़ी मदद मिलती है.
AI कैसे काम करता है?
मुख्य अन्वेषक डॉ. आंद्रेई पुरीस्को बताते हैं कि यह AI एल्गोरिदम हजारों पुराने MRI स्कैन और बायोप्सी परिणामों पर प्रशिक्षित किया गया है. पानी के मॉलिक्यूल की गति- कैंसर के टीशू में पानी के मॉलिक्यूल स्वतंत्र रूप से नहीं घूम पाते. AI इन संकेतों को पहचानकर सटीक लोकेशन बताता है. स्कोरिंग सिस्टम- यह सॉफ्टवेयर PI-RADS स्कोर के साथ-साथ एक 'संभावना मानचित्र' (Probability Map) भी देता है. इससे उन मामलों में भी स्पष्टता आती है जहां रेडियोलॉजिस्ट को संदेह होता है.
AI के सबसे बड़े फायदे
अनावश्यक बायोप्सी से बचाव-यदि AI सिस्टम स्कैन को नेगेटिव बताता है, तो डॉक्टर पूरे आत्मविश्वास के साथ कैंसर की संभावना को खारिज कर सकते हैं, जिससे मरीज दर्दनाक और गैर-जरूरी बायोप्सी से बच जाता है.
जटिल जगहों की पहचान-प्रोस्टेट के किनारों या दूरदराज के हिस्सों में छिपे घावों को पकड़ने में AI इंसानी आंखों से अधिक सही साबित हो रहा है.
समय की भारी बचत- एक सामान्य रेडियोलॉजिस्ट को स्कैन पढ़ने में 15-20 मिनट लगते हैं, जबकि AI इसे मात्र 5 मिनट में पूरा कर देता है.
सटीक रेडिएशन थेरेपी-AI द्वारा बनाए गए कलर-कोडेड मैप्स डॉक्टरों को यह बताते हैं कि शरीर के किस हिस्से में रेडिएशन की अधिक जरूरत है.
क्या AI डॉक्टरों की जगह ले लेगा?
डॉ. क्रिस्टोफर वेट का मानना है कि AI का लक्ष्य डॉक्टरों को हटाना नहीं, बल्कि उनकी क्षमता को बढ़ाना है. यह तकनीक दुनिया भर के उन छोटे अस्पतालों तक विशेषज्ञता पहुंचा सकती है जहां टॉप-लेवल के रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं हैं. हालांकि, अंतिम निर्णय हमेशा एक विशेषज्ञ डॉक्टर का ही रहेगा.