डॉक्‍टर ने बताया, बच्चे में दिखते हैं ये लक्षण, तो उसे है काउंसलिंग की जरूरत, देर ना करें...

कई बार बच्चे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाते और अंदर ही अंदर तनाव झेलते रहते हैं।

Update: 2026-03-30 06:23 GMT

कई बार बच्चे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाते और अंदर ही अंदर तनाव झेलते रहते हैं। ऐसे में कुछ संकेत (लक्षण) हमें बताते हैं कि बच्चे को काउंसलिंग की जरूरत हो सकती है। ये संकेत या लक्षण ऐसे हो सकते हैं, जिन पर समय से ध्यान दिया जाए तो बच्चे को संभाला जा सकता है। ये लक्षण क्‍या हैं और बच्‍चों में ऐसे लक्षण दिखने पर क्‍या करना चाहिए, इस लेख में विस्तार से जानें.

क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट

मुंबई के एसआरसीसी चिल्‍ड्रंस हॉस्पिटल में चाइल्‍ड एंड एडोलसेंट साइकेट्री में कंसल्‍टेंट डॉक्‍टर शॉरुक मोटवानी कहती हैं,


बच्चे अक्सर अपनी भावनात्मक परेशानियों को शब्दों में व्यक्त करने के बजाय अपने व्यवहार के जरिए दिखाते हैं। इन शुरुआती संकेतों को पहचानना माता-पिता और देखभाल करने वालों के लिए समय पर सही मदद देने में सहायक हो सकता है। कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हैं:

  • परिवार या दोस्तों से अचानक दूरी बनाना
  • बार-बार मूड बदलना या चिड़चिड़ापन
  • पढ़ाई में गिरावट आना
  • नींद या खाने की आदतों में बदलाव
  • पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि कम होना
  • भावनात्मक तनाव कभी-कभी गुस्से, अत्यधिक डर या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई के रूप में भी दिखाई देता है।

डॉक्‍टर कहती हैं कि समय पर काउंसलिंग लेने से बच्चों को अपनी भावनाओं को समझने, मानसिक मजबूती विकसित करने और स्वस्थ तरीके से समस्याओं से निपटने में मदद मिलती है।

ये लक्षण दिखें तो क्या करें

डॉक्‍टर्स कहते हैं कि ये लक्षण दिखने पर बच्चे से बात करनी चाहिए। उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाने में हिचकना नहीं चाहिए. बच्चे को काउंसलर के पास भी ले जा सकते हैं, जो बच्चे की काउंसलिंग करके उसकी परेशानी के बारे में और उसके निदान से संबंधी काम करते हैं।

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