सर्दी-जुकाम में जिंक (Zinc) का सेवन, क्या यह वाकई असरदार है या केवल एक मिथक?
जब भी हमें सर्दी-जुकाम, गले में खराश या बहती नाक की समस्या होती है, तो अक्सर जिंक के सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दी जाती है.
जब भी हमें सर्दी-जुकाम, गले में खराश या बहती नाक की समस्या होती है, तो अक्सर जिंक के सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दी जाती है. लेकिन क्या जिंक वाकई आपको जल्दी ठीक कर सकता है? शोध बताते हैं कि इसकी कोई गारंटी नहीं है. कुछ अध्ययनों में जिंक ने लक्षणों को कुछ दिन कम किया, जबकि अन्य में इसका कोई खास असर नहीं देखा गया. इसके अलावा, इसके दुष्प्रभाव (Side effects) काफी असहज और कभी-कभी गंभीर भी हो सकते हैं.
जिंक और सर्दी के वायरस: क्या है वैज्ञानिक आधार?
मायो क्लिनिक के अनुसार, सर्दी-जुकाम का सबसे आम कारण राइनोवायरस (Rhinoviruses) होता है. जिंक के पीछे का विचार प्रयोगशाला के प्रयोगों पर आधारित है. वैज्ञानिकों ने पाया कि जिंक इन वायरसों को शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकता है. 1984 के एक प्रसिद्ध अध्ययन में जिंक की गोलियों (Lozenges) का परीक्षण किया गया. हालांकि इसमें बीमारी का समय कम होने की बात कही गई, लेकिन साथ ही इसके कई दुष्प्रभावों की भी जानकारी दी गई.
सावधान! जिंक के दुष्प्रभाव हो सकते हैं गंभीर
जिंक का सेवन हर किसी के लिए सुखद नहीं होता. रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग जिंक लेते हैं, उन्हें अक्सर इन समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जैसे पेट की खराबी यानी मतली और पेट में ऐंठन. मुंह का स्वाद बिगड़ना या धातु जैसा अहसास होना. गोलियों के इस्तेमाल से जीभ या गले में झुनझुनी. सबसे गंभीर दुष्प्रभाव जिंक नेसल स्प्रे के साथ देखा गया है, जहां कुछ लोगों ने हमेशा के लिए सूंघने की शक्ति (Sense of smell) खो दी.
जिंक को लेकर क्यों है असमंजस?
वैज्ञानिक अभी तक इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं कि जिंक हर किसी पर समान रूप से काम क्यों नहीं करता. इसके पीछे कई जवाब के सवाल हैं. यह साफ नहीं है कि जिंक का कौन सा रूप (जैसे ग्लूकोनेट या एसीटेट) सबसे प्रभावी है. रिसर्च अभी तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि सर्दी ठीक करने के लिए जिंक की कितनी मात्रा (Dose) सुरक्षित और असरदार है. बिना नुकसान के जिंक कैसे लिया जाए, इस पर कोई ठोस गाइडलाइन नहीं है.