औषधीय गुणों से भरपूर देसावरी पान, पेट की समस्या दूर कर मन को देता शांति
देसावरी पान, औषधीय गुणों से भरपूर, पाचन समस्याओं में राहत देता है और मन को शांत करता है।
नई दिल्ली: पान को अक्सर सिर्फ मुंह की ताजगी या स्वाद से जोड़ा जाता है, लेकिन इसमें कई ऐसे औषधीय गुण भी मौजूद हैं जो शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी हैं। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में उगाया जाने वाला देसावरी पान खास तौर पर अपने स्वास्थ्यवर्धक गुणों के लिए जाना जाता है।
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के मुताबिक, देसावरी पान अपनी प्राकृतिक सुगंध, अलग स्वाद और खास औषधीय विशेषताओं के कारण प्रसिद्ध है। यह पान लंबे समय से स्थानीय परंपरा और खानपान का अहम हिस्सा रहा है और महोबा को एक अलग पहचान दिलाता है।
महोबा की मिट्टी, जलवायु और पारंपरिक खेती पद्धति इसे अन्य किस्मों से बेहतर बनाती है। इसकी पत्तियां मुंह में जाते ही जल्दी घुल जाती हैं और हल्की मीठी सुगंध छोड़ती हैं। यही कारण है कि यहां पान की खेती बड़े पैमाने पर होती है और यह स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से देसावरी पान कई फायदे देता है। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, क्योंकि इसकी पत्तियों में मौजूद आवश्यक तेल पाचन एंजाइमों को सक्रिय करते हैं। भोजन के बाद चबाने से गैस, पेट फूलना, एसिडिटी, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिलती है और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।
साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण तनाव कम करने, मन को शांत रखने और नींद सुधारने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में इसे ऊर्जा देने वाला और बलवर्धक भी माना गया है।
देसावरी पान मुंह की सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इसके जीवाणुरोधी गुण मुंह के बैक्टीरिया कम करते हैं, सांस को ताजा रखते हैं और मसूड़ों की समस्याओं से बचाते हैं। इसमें कैल्शियम, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्व होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। कुछ अध्ययनों में इसे घाव भरने, सूजन कम करने और सर्दी-जुकाम में सहायक भी पाया गया है।
देसावरी पान को जीआई टैग भी प्राप्त है, जो इसकी विशिष्टता को प्रमाणित करता है। हालांकि विशेषज्ञ सादा पान खाने की सलाह देते हैं और तंबाकू या चूना मिलाकर सेवन से बचने को कहते हैं। (With inputs from IANS)