कैंसर के बाद की जिंदगी, भारत के पहले नेशनल सर्वाइवरशिप प्रोग्राम में हुआ बड़ा खुलासा, 94.5% रही सर्वाइवल दर
भारत में हजारों परिवारों के लिए "कैंसर मुक्त" शब्द एक नई शुरुआत की तरह होता है. लेकिन इलाज खत्म होने के बाद क्या होता है?
भारत में हजारों परिवारों के लिए "कैंसर मुक्त" शब्द एक नई शुरुआत की तरह होता है. लेकिन इलाज खत्म होने के बाद क्या होता है? अब तक भारत में इस पर कोई ठोस डेटा उपलब्ध नहीं था. 'अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस' (International Childhood Cancer Day) की पूर्व संध्या पर, शोधकर्ताओं ने भारत के पहले बड़े और राष्ट्रीय स्तर के 'चाइल्डहुड कैंसर सर्वाइवरशिप प्रोग्राम' के निष्कर्ष जारी किए हैं. यह अध्ययन 'द लैंसेट रीजनल हेल्थ - साउथईस्ट एशिया' में प्रकाशित हुआ है, जिसमें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु सहित 20 केंद्रों के 5,400 से अधिक बच्चों के डेटा का विश्लेषण किया गया है.
रिसर्च में आई खुश कर देने वाले परिणाम
2016 में इंडियन पीडियाट्रिक हेमेटोलॉजी ऑन्कोलॉजी ग्रुप द्वारा शुरू किए गए इस अध्ययन के शुरुआती नतीजे बेहद उत्साहजनक हैं. पांच साल की कुल जीवित रहने की दर (Overall Survival) 94.5% रही. यह दर 89.9% दर्ज की गई.इलाज पूरा होने के दो साल बाद जीवित रहने की संभावना बढ़कर 98.2% हो जाती है.दिसंबर 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, 92% बच्चे जीवित हैं और कैंसर मुक्त (Remission) हैं.
कैंसर के प्रकार और उपचार
इस स्टडी में शामिल बच्चों में ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) सबसे आम था, जो कुल मामलों का 41% था. इसके अलावा हॉजकिन लिंफोमा, बोन ट्यूमर और रेटिनोब्लास्टोमा (आंखों का कैंसर) के मामले प्रमुखता से देखे गए. उपचार के दौरान लगभग सभी बच्चों को कीमोथेरेपी दी गई. हर चार में से एक बच्चे की रेडियोथेरेपी हुई. एक-तिहाई बच्चों को सर्जरी और आधे से अधिक को ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ी.
अब 'इलाज' नहीं, 'जीवन की गुणवत्ता' पर ध्यान
AIIMS नई दिल्ली में ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख और मुख्य लेखिका डॉ. रचना सेठ ने कहा, "सालों तक हमारा ध्यान केवल इस बात पर था कि बच्चा जीवित बच जाए। लेकिन अब हम जानते हैं कि वे जीवित बचते हैं और उनके पास दशकों का जीवन आगे होता है. अब महत्वपूर्ण यह है कि वे इलाज के बाद कैसे जीते हैं."
डॉ. सेठ के अनुसार, कैंसर सर्वाइवर्स को भविष्य में कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे हृदय संबंधी समस्याएं (Cardiac Dysfunction)प्रजनन क्षमता (Fertility) से जुड़ी चिंताएं. संज्ञानात्मक समस्याएं (Cognitive issues) और दोबारा कैंसर होने का जोखिम.