AIIMS Dry Eye Treatment: अब आई ड्रॉप्स की जरूरत नहीं! एम्स ने खोजी 'मां के दूध' वाले प्रोटीन से बनी टैबलेट, मिटाएगी आंखों का सूखापन
AIIMS नई दिल्ली के आरपी सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक साइंसेज से एक अच्छी और बड़ूी खबर आई है.
आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन और लैपटॉप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन घंटों स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने की कीमत हमारी आंखें चुका रही हैं. जिसके वजह से 'ड्राई आई' (Dry Eye) जैसी समस्या होने लगती है, दरअसल, अब ड्राई आई एक आम समस्या बन गई है, जिससे राहत के लिए लोग बार-बार आई ड्रॉप्स का सहारा लेते हैं. इस बीच, एम्स (AIIMS), नई दिल्ली के आरपी सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक साइंसेज से एक अच्छी और बड़ूी खबर आई है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसी टैबलेट का सफल ट्रायल किया है जो आंखों के सूखेपन को जड़ से खत्म कर सकती है.
क्या है 'लैक्टोफेरिन' टैबलेट?
एम्स के आरपी सेंटर की विशेषज्ञ डॉ. नम्रता शर्मा और डॉ. सुजाता शर्मा के नेतृत्व में 'लैक्टोफेरिन' (Lactoferrin) नामक दवा पर क्लीनिकल ट्रायल किया गया. प्राकृतिक रिसोर्स यह कोई आर्टिफिसियस कैमिकल नहीं है, बल्कि मां के दूध में पाया जाने वाला एक प्राकृतिक प्रोटीन है. यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने और हीलिंग में मदद करता है. इस दवा को जापान में तैयार किया गया है और एम्स ने इसका कड़ा परीक्षण किया है.
ट्रायल के शानदार नतीजे
ट्रायल के दौरान 200 मरीजों (400 आंखों) को शामिल किया गया. इन्हें तीन महीने तक दिन में दो बार 250 मिलीग्राम लैक्टोफेरिन दिया गया. मरीजों की आंखों में प्राकृतिक नमी वापस आई. आंसुओं की मात्रा और उनकी गुणवत्ता, दोनों में कमाल का सुधार देखा गया. जहां, आई ड्रॉप्स केवल कुछ घंटों की राहत देते हैं, वहीं इस टैबलेट ने समस्या की जड़ पर काम किया.
आई ड्रॉप्स से कितनी अलग है यह दवा?
अभी तक ड्राई आई का इलाज मुख्य रूप से 'आर्टिफिशियल टियर्स' (नकली आंसू) या आई ड्रॉप्स से होता है. ये केवल लक्षणों को दबाते हैं, ठीक नहीं करते. इसके विपरीत, लैक्टोफेरिन टैबलेट आंखों के पूरे सिस्टम को प्राकृतिक रूप से संतुलित करती है, जिससे लंबे समय तक आराम मिलता है.
सावधानी और सुझाव
हालांकि यह दवा जल्द ही बाजार में आने की उम्मीद है, लेकिन डिजिटल स्क्रीन का उपयोग करते समय कुछ बुनियादी नियमों का पालन करना अब भी जरूरी है. हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर देखें और 20 बार पलकें झपकाएं. भरपूर पानी पिएं ताकि शरीर और आंखों में नमी बनी रहे. आंखों में लगातार किरकिरी या थकान महसूस होने पर एक्सपर्ट से सलाह लें.