"सावधान! स्मार्टफोन की लत बिगाड़ सकती है आपकी भूख, स्टडी में इस खतरे का खुलासा, जानिए क्या है ईटिंग डिसऑर्डर
हद से ज्यादा स्मार्टफोन का इस्तेमाल आपको भूख को भी बिकाड़ सकती है. इसलिए सावधान रहे.
स्मार्टफोन नींद, मनोदशा और आंखों को प्रभावित करते हैं, यह ये सब जानते हैं, लेकिन नए रिसर्च से पता चलता है कि इनका प्रभाव खान-पान की आदतों पर भी पड़ सकता है. मोबाइल उपकरणों के दैनिक जीवन में गहराई से समाहित होने के साथ, वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने में लगे हैं कि इनका ज्यादा उपयोग मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-धारणा को कैसे प्रभावित कर सकता है.
स्मार्टफोन आपके भूख को कैसे बिगाड़ती है
जर्नल ऑफ मेडिकल इंटरनेट रिसर्च में प्रकाशित एक स्टडी में "समस्याग्रस्त स्मार्टफोन उपयोग" (पीएसयू) की जांच की गई, जो एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपने उपकरणों पर निर्भरता विकसित कर लेते हैं. यह केवल बार-बार उपयोग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें फोन पर बिताए गए समय को कंट्रोल करने में कठिनाई, साथ ही उनसे अलग होने पर चिंता या बेचैनी भी शामिल है. रिसर्च में विश्लेषण किया गया कि यह व्यवहार युवाओं में शारीरिक छवि और खान-पान की आदतों से कैसे संबंधित है.
निष्कर्ष बताते हैं कि जो व्यक्ति स्मार्टफोन पर ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनमें अपनी दिखावट से असंतुष्टि और अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों का अनुभव होने की संभावना अधिक होती है. औपचारिक निदान के बिना भी, कई लोग भावनात्मक खान-पान या ऑनलाइन कंटेंट से जुड़ी नेगेटिव सेल्फ इमेंज जैसे प्रारंभिक चेतावनी संकेत दिखाते हैं. इस स्टडी में 35 रिसर्च पत्रों की समीक्षा की गई, जिनमें 17 वर्ष की औसत आयु वाले 52,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल थे. इससे पता चलता है कि यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल लेवल पर है. किशोर, विशेष रूप से, अधिक संवेदनशील प्रतीत होते हैं क्योंकि वे अपनी पहचान बनाते समय अक्सर सामाजिक तुलना करते हैं.
रिसचर्र ने स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल और खाने-पीने संबंधी विकारों, जैसे भावनात्मक रूप से अधिक खाना, बिना कंट्रोल के और भोजन पर निर्भरता, के बीच एक संबंध पाया. ये व्यवहार अक्सर शारीरिक भूख के बजाय तनाव, उदासी या चिंता से निपटने के तंत्र के रूप में उभरते हैं. ये प्रभाव उन व्यक्तियों में अधिक साफ थे जो प्रतिदिन सात घंटे से अधिक स्मार्टफोन का उपयोग करते थे. ज्यादा इस्तेमाल का संबंध शरीर के प्रति असंतोष से भी था, जिसका मुख्य कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आडियल लोगों छवियों के बार-बार संपर्क में आना है, जो आत्म-धारणा को विकृत कर सकता है. जरूरी बात यह है कि स्टडी सामान्य स्मार्टफोन उपयोग और समस्याग्रस्त स्मार्टफोन उपयोग (पीएसयू) के बीच अंतर करता है, जिसकी विशेषता फोन अनुपलब्ध होने पर चिड़चिड़ापन या चिंता जैसे लक्षण, उपयोग पर कंट्रोल खोना और दैनिक कामकाज या मानसिक स्वास्थ्य में बाधा है.
रिसर्चर ने साफ किया कि स्मार्टफोन सीधे तौर पर खाने संबंधी विकारों का कारण नहीं बनते, बल्कि एक सहायक जोखिम कारक के रूप में कार्य करते हैं. वे सुझाव देते हैं कि स्वास्थ्य पेशेवरों को खाने से संबंधित समस्याओं का मूल्यांकन और उपचार करते समय व्यक्ति के प्रौद्योगिकी के साथ संबंध पर विचार करना चाहिए, क्योंकि डिजिटल आदतों का प्रबंधन पारंपरिक उपचारों जितना ही जरूरी हो सकता है.
कम शारीरिक हलचल और शारीरिक तनाव
लंबे समय तक इस्तेमाल करने से सुस्त जीवनशैली, नींद में दिक्कत, आंखों पर ज़ोर और शरीर की बनावट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, जिसका असर पूरी शारीरिक सेहत पर पड़ सकता है.
मानसिक सेहत
स्मार्टफोन के ज़्यादा इस्तेमाल का संबंध बढ़ती बेचैनी, डिप्रेशन और अकेलेपन की भावना से जोड़ा गया है. इसकी मुख्य वजह अक्सर डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर दूसरों से अपनी तुलना करना होता है.
ध्यान और काम करने की क्षमता में कमी
स्मार्टफ़ोन से बार-बार ध्यान भटकने से एकाग्रता का स्तर कम हो सकता है, जिसका पढ़ाई और काम-काज की जगहों पर काम करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है.
सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं
गाड़ी चलाने जैसी गतिविधियों के दौरान स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करने से ध्यान बंटने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा काफ़ी बढ़ जाता है.
बेहतर संतुलन के लिए इस्तेमाल को नियंत्रित करना
एक्सपर्ट का सुझाव है कि स्मार्टफ़ोन के इस्तेमाल के लिए साफ़ सीमाएं तय की जाए, समय-समय पर डिजिटल दुनिया से ब्रेक लिया जाए, और ऐसी ऑफ़लाइन गतिविधियों में हिस्सा लिया जाए जो मन की शांति और असल दुनिया में लोगों से मेल-जोल को बढ़ावा देती हैं. डिवाइस पर अपनी निर्भरता कम करने से मानसिक और शारीरिक, दोनों तरह की सेहत को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.