वात बढ़ने से भी हो सकता है आंखों के ऊपर और बीच में दर्द, आयुर्वेद में बताए गए हैं लाभकारी उपाय
वात दोष बढ़ने से आंखों के ऊपर और बीच में दर्द हो सकता है, जिसे आयुर्वेदिक उपायों से कम किया जा सकता है।
नई दिल्ली: लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करना या मोबाइल का अत्यधिक उपयोग सिर दर्द का एक सामान्य कारण है, लेकिन हर सिर दर्द इसी वजह से नहीं होता। कुछ लोगों को सुबह उठते ही सिर भारी महसूस होता है और भौंहों के पास दर्द होता है, जिसका मुख्य कारण अधूरी नींद और न्यूरो-हॉर्मोनल असंतुलन है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आंखों के ऊपर और भौंहों के बीच का क्षेत्र फ्रंटल साइनस और ट्राइजेमिनल नर्व से जुड़ा होता है। नींद पूरी न होने पर इस क्षेत्र में तेज़ दर्द होता है, जिससे सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है और सिर दर्द के साथ आंखों की मांसपेशियों पर भी दबाव बढ़ता है।
आयुर्वेद इस समस्या को शरीर में वात दोष की वृद्धि और नींद की कमी से जोड़ता है। जब वात बढ़ता है, नींद प्रभावित होती है, और इससे पूरे तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ता है, जिससे सिर और आंखों में दर्द और भारीपन महसूस होता है। आयुर्वेद में इस परेशानी के लिए कई आसान उपाय बताए गए हैं।
पहला उपाय है नस्य विधि, जिसमें रात को सोने से पहले नाक में कुछ बूंदें देसी घी की डालना शामिल है। यह नाक की बंदी को कम करता है और सांस लेने में मदद करता है। दूसरा उपाय है तलवों की मालिश, क्योंकि तलवों में कई प्रेशर पॉइंट्स होते हैं जो शरीर को शांत करते हैं और नींद लाने में सहायक हैं।
इसके अलावा ब्राह्मी और जटामांसी का सेवन सिर दर्द कम करने और मानसिक शांति देने में मदद करता है। त्रिफला जल से आंखों का प्रक्षालन करने से आंखों की थकान कम होती है। रात में हल्दी, काली मिर्च और जायफल का दूध पीने से नींद आती है, मस्तिष्क शांत होता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।
ये सभी उपाय सिर दर्द और आंखों के तनाव को कम करने के लिए सरल, प्राकृतिक और प्रभावी हैं। (With inputs from IANS)