क्या थायराइड से सिर्फ आयोडीन पर्याप्त है? जानिए सेलेनियम और जिंक का महत्व
आज की युवा पीढ़ी में थायराइड और शुगर जैसी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। बच्चों और युवाओं में भी इसके लक्षण देखे जा रहे हैं।
आज की युवा पीढ़ी में थायराइड और शुगर जैसी बीमारियों का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय बन गया है। बच्चों और युवाओं में भी थायराइड और शुगर के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। थायराइड को लेकर कई मिथक प्रचलित हैं, जिनमें सबसे बड़ा यह माना जाता है कि थायराइड से बचने के लिए केवल आयोडीन युक्त नमक का सेवन ही पर्याप्त है। हालांकि यह आंशिक रूप से सही है।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि थायराइड ग्रंथि के सुचारू संचालन के लिए सिर्फ आयोडीन पर्याप्त नहीं है। थायराइड हार्मोन बनाने और उनका सही उपयोग करने के लिए सेलेनियम और जिंक की भी आवश्यकता होती है। इन दोनों पोषक तत्वों के बिना थायराइड ग्रंथि सही ढंग से काम नहीं कर पाती, जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
आयुर्वेद में थायराइड को केवल हॉर्मोनल समस्या नहीं माना गया है, बल्कि इसे शरीर की 'अग्नि' यानी मेटाबॉलिज्म की मंद गति से जोड़ा गया है। थायराइड ग्रंथि में कफ और मेद धातु के दूषित होने से गले में विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं, जो लंबे समय तक रहने पर संक्रमण और सूजन का कारण बनते हैं। इससे निगलने में कठिनाई, गले में सूजन और तेज बोलने में परेशानी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
थायराइड ग्रंथि मुख्य रूप से दो हार्मोन टी-3 और टी-4 बनाती है। सेलेनियम निष्क्रिय T4 को सक्रिय T3 में बदलने में मदद करता है, जिससे शरीर हार्मोन का उत्पादन और उपयोग दोनों सही तरीके से कर पाता है। वहीं, जिंक कोशिकाओं में रिसेप्टर्स को सक्रिय करता है, जिससे हार्मोन को शरीर पहचान सके और उनका सही उपयोग हो।
आयुर्वेद में थायराइड को नियंत्रित करने के लिए कुछ घरेलू उपाय भी सुझाए गए हैं। मेथी का पानी पीना, हरा धनिया का सेवन करना और कद्दू के बीज को आहार में शामिल करना फायदेमंद माना गया है। कद्दू के बीज में जिंक और सेलेनियम दोनों प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो थायराइड ग्रंथि के संतुलन और हॉर्मोन सक्रियता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इस प्रकार, थायराइड से बचाव और नियंत्रण के लिए केवल आयोडीन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। संतुलित पोषण, सेलेनियम और जिंक का सेवन, साथ ही आयुर्वेदिक उपायों और स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली के माध्यम से थायराइड को नियंत्रित किया जा सकता है।
With Inputs From IANS