Hepatitis B Prevention: गर्भवती महिलाएं सावधान! मां से बच्चे में हेपेटाइटिस बी फैलने से रोकने के लिए एक्सपर्ट के 5 जरूरी टिप्स

हेपेटाइटिस बी का वायरस संक्रमित खून या शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है.

Update: 2026-04-04 14:00 GMT

'हेपेटाइटिस बी फाउंडेशन' के अनुसार, जन्म के समय संक्रमित होने वाले शिशुओं में क्रोनिक संक्रमण विकसित होने की 90 प्रभावित संभावना होती है. हेपेटाइटिस बी का वायरस संक्रमित खून या शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है. अक्सर बच्चों और छोटे बच्चों में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन वयस्कों में पीलिया (Jaundice), ज्यादा थकान, गहरे रंग का पेशाब और पेट दर्द जैसे संकेत मिल सकते हैं. गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के समय सावधानी बरतकर बच्चे को इस गंभीर बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है.

मां से बच्चे में संक्रमण रोकने के 5 तरीके

प्रारंभिक स्क्रीनिंग (Early Screening)

गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में ही हेपेटाइटिस बी की जांच कराना अनिवार्य है. अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो डॉक्टर तुरंत सुरक्षात्मक कदम उठा सकते हैं. ध्यान रखें, बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा न लें.

समय पर टीकाकरण (Vaccination on Time)

शिशु को हेपेटाइटिस बी से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है. बच्चे के जन्म के 24 घंटे के भीतर वैक्सीन की पहली खुराक (Birth Dose) दी जानी चाहिए. इसके बाद अगले 6 महीनों में दो और खुराकें दी जाती हैं.

हेपेटाइटिस बी इम्युनोग्लोबुलिन (HBIG)

अगर मां संक्रमित है, तो जन्म के 12 घंटे के भीतर बच्चे को HBIG का इंजेक्शन दिया जाता है. यह शिशु को संक्रमण के खिलाफ तत्काल और अस्थायी सुरक्षा प्रदान करता है.

एंटीवायरल दवाएं (Maternal Antiviral Medication)

संक्रमण के स्तर (Viral Load) को कम करने के लिए डॉक्टर गर्भावस्था के अंतिम हफ्तों में मां को एंटीवायरल दवाएं दे सकते हैं. इससे प्रसव के दौरान बच्चे में वायरस फैलने का खतरा काफी कम हो जाता है.

सुरक्षित प्रसव और स्तनपान

डॉक्टर की देखरेख में सामान्य प्रसव और स्तनपान आमतौर पर सुरक्षित होते हैं, बशर्ते बच्चे को जन्म के तुरंत बाद सही वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन मिल गया हो. नियमित चेकअप मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए जरूरी है.

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