उषापान से करें दिन की शुरुआत, मन हल्का, पाचन बेहतर और डिटॉक्स होगी बॉडी

उषापान से दिन की शुरुआत करने से मन हल्का रहता है, पाचन बेहतर होता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।

Update: 2026-01-14 08:00 GMT

नई दिल्ली: स्वस्थ जीवन जीने के लिए बड़े और जटिल बदलावों की आवश्यकता नहीं होती। कई बार सिर्फ छोटी-छोटी आदतें ही हमारे स्वास्थ्य में बड़ा फर्क ला देती हैं। आयुर्वेद में ऐसी ही एक सरल लेकिन बेहद लाभकारी प्रथा है जिसे उषापान कहा जाता है। इसका अर्थ है सुबह उठते ही खाली पेट गुनगुना पानी पीना। यह आदत न केवल पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है, बल्कि पूरे शरीर के लिए ऊर्जा, हल्कापन और तरोताजा महसूस कराने में सहायक होती है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, उषापान को दिनचर्या में शामिल करने से शरीर से टॉक्सिन्स निकलते हैं, पाचन शक्ति मजबूत होती है, पेट साफ रहता है और मानसिक रूप से भी व्यक्ति हल्का महसूस करता है। यदि संभव हो तो पानी को रातभर तांबे के लोटे या मिट्टी के घड़े में रखकर पीना चाहिए। तांबे का पानी विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है क्योंकि यह बैक्टीरिया से सुरक्षा प्रदान करता है और शरीर को आवश्यक खनिजों से भरता है।

आयुर्वेद में यह बताया गया है कि जागने के तुरंत बाद पहले हाथ-पैर धोएं और फिर गुनगुना या सामान्य तापमान का पानी पिएं। एक गिलास पानी से दिन की शुरुआत करना भी काफी है। यह छोटी सी आदत पाचन तंत्र को उत्तेजित करती है, जिससे मल और मूत्र आसानी से बाहर निकलते हैं। इसके परिणामस्वरूप कब्ज, गैस और अपच जैसी आम समस्याएं दूर रहती हैं। साथ ही, यह शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करता है, जिससे त्वचा साफ और शरीर हल्का महसूस होता है।

उषापान का नियमित अभ्यास मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे वजन नियंत्रित रहता है। यह आदत इम्यूनिटी को भी मजबूत बनाती है और शरीर को बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनाती है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी यह फायदेमंद है क्योंकि शरीर हल्का और ऊर्जा से भरपूर रहने पर मन को शांति और ताजगी मिलती है।

इस तरह, उषापान एक बेहद सरल, सस्ती और प्रभावी उपाय है, जिसे कोई भी अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में आसानी से शामिल कर सकता है। केवल एक गिलास गुनगुना पानी पीकर दिन की शुरुआत करना शरीर और मन दोनों के लिए कई स्वास्थ्य लाभ लेकर आता है, और यह छोटी सी आदत लंबे समय तक स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यदि आप इसे नियमित रूप से अपनाते हैं, तो न केवल पाचन और ऊर्जा में सुधार आएगा, बल्कि यह शरीर को अंदर से स्वस्थ बनाए रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करेगा। (With inputs from IANS)

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