फरवरी की हल्की ठंड कर सकती है बीमार, जानें ऋतु परिवर्तन को लेकर क्या कहता है आयुर्वेद

फरवरी में मौसम बदलने पर आयुर्वेदिक सावधानियां बीमारी से बचाती हैं।

Update: 2026-02-07 07:15 GMT

नई दिल्ली: फरवरी का महीना आमतौर पर त्योहारों, सुहावने मौसम और हल्की ठंड के लिए जाना जाता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह समय सेहत के लिहाज से काफी संवेदनशील भी होता है। इस महीने में सर्दियों की विदाई और गर्मी की दस्तक के बीच जो बदलाव होता है, उसे ऋतु परिवर्तन कहा जाता है। इसी बदलाव के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सबसे अधिक प्रभावित होती है और लोग जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं।

फरवरी में दिन के समय तेज धूप निकलती है, जिससे लोगों को गर्मी का एहसास होता है। इसके चलते कई लोग गर्म कपड़े पहनना छोड़ देते हैं और ठंडा पानी या ठंडी चीजें खाना शुरू कर देते हैं। वहीं सुबह और शाम के समय पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाएं शरीर को ठिठुरन का एहसास कराती हैं।

दिन और रात के तापमान में यह उतार-चढ़ाव शरीर के लिए संतुलन बनाए रखना मुश्किल कर देता है। यही कारण है कि इस मौसम में वायरल संक्रमण, सर्दी-खांसी, बुखार, गले में खराश और यहां तक कि टाइफाइड जैसे रोगों के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं।

आयुर्वेद मानता है कि फरवरी से मार्च तक का समय इम्युनिटी के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण होता है। इस दौरान शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है, इसलिए विशेष देखभाल की जरूरत होती है। आयुर्वेद में इस मौसम के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय बताए गए हैं।

इनमें सबसे प्रमुख है गिलोय और तुलसी के काढ़े का सेवन। गिलोय को आयुर्वेद में ‘अमृता’ कहा गया है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है। रोज सुबह गिलोय और तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने से संक्रमण का खतरा कम होता है और शरीर अंदर से मजबूत बनता है।

इसके अलावा सोंठ और शहद का सेवन भी बेहद लाभकारी माना गया है। यह खांसी, जुकाम और गले की समस्याओं में राहत देता है तथा फेफड़ों में जमा कफ को बाहर निकालने में सहायक होता है। आयुर्वेद यह भी सलाह देता है कि इस मौसम में पूरे दिन गुनगुना पानी ही पिएं। ठंडा पानी या फ्रिज का पानी पीना सबसे बड़ी गलती हो सकती है, क्योंकि इससे पाचन तंत्र कमजोर पड़ता है और सर्दी-जुकाम का खतरा बढ़ जाता है।

खान-पान में भी सावधानी बरतना जरूरी है। दही, आइसक्रीम और ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए, जबकि भोजन में सर्दियों की तरह गर्म तासीर वाला खाना शामिल करना लाभकारी होता है। साथ ही, हल्की गर्मी महसूस होने पर भी गर्म कपड़े पूरी तरह न छोड़ें। आयुर्वेद के अनुसार, सही दिनचर्या, संतुलित आहार और थोड़ी-सी सावधानी फरवरी के महीने में होने वाली कई बीमारियों से बचाव कर सकती है। (With inputs from IANS)

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