World Health Day: स्वस्थ भारत' की नींव मजबूत कर रहा AIIMS नेटवर्क, दिल्ली एम्स से लेकर नए संस्थानों तक, जानें कैसे बदल रही है देश की सेहत
एम्स नई दिल्ली आज न केवल भारत का, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े तीसरा देखभाल (Tertiary Care) अस्पतालों में से एक है.
एम्स नई दिल्ली आज न केवल भारत का, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े तीसरा देखभाल (Tertiary Care) अस्पतालों में से एक है. 4,000 बिस्तरों की क्षमता वाले इस संस्थान में हर साल लगभग 50 लाख मरीज ओपीडी (OPD) में आते हैं और 3 लाख से अधिक सर्जरी की जाती हैं. लेकिन एम्स की कहानी अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है. एम्स के डायरेक्टर डॉ. एम. श्रीनिवास ने एम्स की उन सारी फैसलिटी के बारे में बताया है जो देश भर में मरीजों के लिए काम कर रहा है.
PMSSY: भारत के हर कोने में पहुंचता एम्स
'प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना' (PMSSY) के तहत देश में 22 नए एम्स स्वीकृत किए गए हैं. ऋषिकेश, देवघर और बिलासपुर जैसे क्षेत्रों में अब अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) और कैंसर सर्जरी जैसी सुविधाएं स्थानीय लेवल पर उपलब्ध हैं. इससे गरीब परिवारों को इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ता और उनके खर्च में भारी कमी आई है.
तकनीक और अनुसंधान में अग्रणी
AI इन हेल्थकेयर, एम्स दिल्ली 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में टीबी (TB) के निदान और कैंसर स्क्रीनिंग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर रहा है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा एम्स के 57 संकाय सदस्यों को दुनिया के टॉप 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में स्थान दिया गया है. जनवरी 2026 में, सभी एम्स संस्थानों ने 'पैन-एम्स रिसर्च कंसोर्टियम' पर साइन किए हैं, जो कम लागत वाले कैंसर उपचार और नई बीमारियों पर मिलकर रिसर्च करेंगे.
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में योगदान
एम्स नई दिल्ली ने सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में मिसाल पेश की है. दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में लगभग 80 प्रतिशत आयुष्मान दावों का निपटान अकेले एम्स दिल्ली द्वारा किया गया है. जन औषधि केंद्र के जरिए से मरीजों को किफायती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. 'स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान' के जरिए कैंसर स्क्रीनिंग, टीकाकरण और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श जैसे निवारक स्वास्थ्य उपाय सीधे समुदाय तक पहुंचाए जा रहे हैं.