सर्वाइकल कैंसर, भारत में महिलाओं के लिए बड़ा खतरा, जानें क्यों जरूरी है समय पर जांच और टीकाकरण
सर्वाइकल कैंसर, भारत में महिलाओं के लिए बड़ा खतरा हैं, इसलिए जरूरी है कि सही समय पर इसकी पहचान हो जाए.
भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) एक अत्यंत गंभीर चुनौती बना हुआ है. आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में इस बीमारी से होने वाली मौतों में से लगभग एक-तिहाई हिस्सा भारत का है. हमारे देश में हर साल 1.22 लाख से अधिक नए मामले सामने आते हैं और हर कुछ मिनटों में एक महिला इस बीमारी के कारण दम तोड़ देती है.
क्या है सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण?
सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के उच्च जोखिम वाले स्ट्रेन हैं. यह वायरस आमतौर पर यौन सक्रियता शुरू होने के बाद शरीर में प्रवेश करता है. भारत में 53 में से एक महिला को जीवन भर में इस कैंसर के होने का खतरा बना रहता है. खराब मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) और जागरूकता की कमी इस खतरे को और बढ़ा देती है.
भ्रम बनाम हकीकत: क्या यह सिर्फ बुजुर्ग महिलाओं को होता है?
एक आम धारणा है कि सर्वाइकल कैंसर केवल अधिक उम्र की महिलाओं को होता है, लेकिन यह सच नहीं है. यह बीमारी शरीर में धीरे-धीरे विकसित होती है. संक्रमण युवावस्था में हो सकता है और समय के साथ यह कैंसर का रूप ले लेता है. इसलिए, रोकथाम के प्रयास शुरुआती उम्र से ही शुरू होने चाहिए.
बचाव का सबसे प्रभावी तरीका: HPV टीकाकरण (Vaccination)
सर्वाइकल कैंसर उन चुनिंदा कैंसरों में से एक है जिसे टीकाकरण के जरिए आसानी से रोका जा सकता है. 9 से 15 वर्ष की लड़कियों के लिए यह टीका सबसे प्रभावी है. 26 वर्ष की आयु तक की युवतियां भी यह टीका लगवा सकती हैं. यह वैक्सीन HPV 16 और 18 जैसे वायरस से बचाती है, जो भारत में 80-85% मामलों के लिए जिम्मेदार हैं.
नियमित स्क्रीनिंग: जल्दी पहचान ही जीवन है
भारत में 75 प्रतिशत मरीजों में कैंसर का पता तब चलता है जब वह शरीर में फैल चुका होता है. नियमित जांच जैसे पैप स्मीयर (Pap Smear), LBC टेस्ट और HPV मूल्यांकन के जरिए कैंसर बनने से पहले की कोशिकाओं (Precancerous changes) की पहचान की जा सकती है. 30 से 65 वर्ष की महिलाओं को नियमित अंतराल पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए.