थायरॉयड के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी, शोध सहयोग पर फोकस: मंत्री जितेंद्र सिंह
मंत्री जितेंद्र सिंह ने थायरॉयड के प्रति जागरूकता बढ़ाने और शोध सहयोग पर जोर दिया।
मुंबई: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि थायरॉयड से जुड़ी बीमारियां सिर्फ व्यक्तिगत स्वास्थ्य का मामला नहीं हैं, बल्कि ये देश की उत्पादकता, जनसांख्यिकी और राष्ट्र निर्माण से भी सीधे जुड़ी हैं। उन्होंने चिकित्सक समुदाय और शोधकर्ताओं से जागरूकता बढ़ाने, समय पर निदान करने और शोध सहयोग को मजबूत करने की अपील की।
देश में थायरॉयड विकारों का पैमाना
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में लगभग 4.2 करोड़ लोग थायरॉयड विकारों से प्रभावित हैं। विशेष रूप से हाइपोथायरॉयडिज्म अधिक देखा जाता है, जो अक्सर बिना पहचान के रह जाता है। यह समस्या वयस्कों की ऊर्जा, कार्यक्षमता और दीर्घकालिक उत्पादकता पर नकारात्मक असर डालती है।
हाइपोथायरॉयडिज्म और गर्भावस्था
हाइपोथायरॉयडिज्म लगभग 11 प्रतिशत वयस्कों को प्रभावित करता है। यदि गर्भावस्था के दौरान इसका समय पर पता न चले, तो यह बच्चों में जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म और अपरिवर्तनीय न्यूरो-डेवलपमेंटल नुकसान का कारण बन सकता है।
बहु-विषयक सहयोग और सामाजिक जागरूकता की जरूरत
मंत्री ने जोर देकर कहा कि थायरॉयड जैसी बड़ी चिकित्सा चुनौती केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हो सकती। इसके लिए जीवन विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान और अन्य सहयोगी क्षेत्रों के बीच मजबूत समन्वय और व्यापक सामाजिक जागरूकता जरूरी है।
भारत की शोध और जैव प्रौद्योगिकी प्रगति
डॉ. सिंह ने बायोफार्मा शक्ति मिशन और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 1 लाख करोड़ रुपये के रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन फ्रेमवर्क में निजी और परोपकारी संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। भारत ने एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक विकसित की, हीमोफीलिया के लिए जीन थेरेपी सफलतापूर्वक लागू की और कोविड-19 महामारी में डीएनए वैक्सीन का प्रभावी उपयोग किया।
निष्कर्ष
थायरॉयड जागरूकता, समय पर निदान और शोध सहयोग न केवल स्वास्थ्य सुधारने में मदद करेगा, बल्कि देश की उत्पादकता और मानव संसाधन क्षमता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। (With inputs from IANS)