कैंसर मुक्त भविष्य के लिए एम्स निदेशक की अपील, अभिभावक और शिक्षक मिलकर सफल बनाएं देश का HPV टीकाकरण अभियान

एम्स निदेशक ने माता-पिता, शिक्षकों से HVP टिकाकरण अभियान का समर्थन करने का आग्रह किया है.

Update: 2026-03-02 06:15 GMT

भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया है. इस अभियान का उद्देश्य देश की 14 साल की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) जैसी जानलेवा बीमारी से उम्र भर के लिए सुरक्षित करना है. एम्स (AIIMS), दिल्ली के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक 'परिवर्तनकारी क्षण' बताया है.

HPV से कैंसर बनने का सफर: संक्रमण से ट्यूमर तक

HPV एक बहुत ही सामान्य वायरस है, लेकिन इसका कैंसर में बदलना एक धीमी प्रक्रिया है. एक सामान्य महिला में HPV संक्रमण को कैंसर में बदलने में 15 से 20 साल का समय लगता है. HIV या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में यह प्रक्रिया तेज हो सकती है और मात्र 5 से 10 साल में कैंसर विकसित हो सकता है.

संक्रमण के चरण (Stages)

वायरस शरीर की कोशिकाओं (जैसे गर्भाशय ग्रीवा) में प्रवेश करता है. अगर इम्यून सिस्टम इसे खत्म नहीं कर पाता, तो वायरस कोशिकाओं के भीतर बना रहता है. समय के साथ वायरस कोशिकाओं के DNA को बदल देता है, जिसे 'प्री-कैंसर' या डिसप्लेसिया कहा जाता है. अगर इस स्तर पर इलाज न मिले, तो ये कोशिकाएं अनियंत्रित होकर कैंसर का ट्यूमर बन जाती हैं.

क्यों है टीकाकरण अनिवार्य?

सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं की कैंसर से होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है. डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है. 9 से 14 साल की उम्र में टीका लगाना सबसे प्रभावी है, क्योंकि यह वायरस के संपर्क में आने से पहले सुरक्षा की एक मजबूत दीवार खड़ी कर देता है. चूंकि शुरुआती चरणों में लक्षण नहीं दिखते, इसलिए टीका लगवाना और नियमित स्क्रीनिंग (Screening) कराना ही एकमात्र उपाय है.

डॉक्टरों की अपील

एम्स निदेशक ने माता-पिता, शिक्षकों और सामुदायिक नेताओं से इस अभियान का समर्थन करने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि टीकाकरण न केवल बीमारी को रोकता है, बल्कि परिवारों पर पड़ने वाले भावनात्मक और वित्तीय बोझ को भी कम करता है.

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