पाक‍िस्‍तान में गहराया टीबी संकट, हर दिन 140 मौतें : र‍िपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में टीबी का संकट गंभीर हो गया है, जहां हर दिन लगभग 140 लोगों की मौत हो रही है।

Update: 2026-04-10 11:00 GMT

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में तपेदिक (टीबी) अब भी सबसे घातक बीमारियों में शामिल है, जो हर साल हजारों लोगों की जान ले रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में रोजाना 1,800 से अधिक नए टीबी मामले दर्ज किए जाते हैं और लगभग 140 लोगों की मौत होती है।

यह आंकड़े बताते हैं कि इस बीमारी से निपटने के लिए पाकिस्तान के मौजूदा प्रयास पर्याप्त नहीं हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) की ओर से विश्व तपेदिक दिवस पर जारी आंकड़े पाकिस्तान के लिए चेतावनी की तरह हैं। इस संकट का पैमाना बहुत बड़ा है, क्योंकि हर साल 6,69,000 से अधिक लोग टीबी से संक्रमित होते हैं और 51,000 मौतें होती हैं।

पाकिस्तान के बिजनेस रिकॉर्डर में एक संपादकीय के अनुसार, पाकिस्तान पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में टीबी मामलों का 73 प्रतिशत हिस्सा रखता है और दुनिया में पांचवें नंबर पर है। यह लगातार दिखाता है कि देश इस सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती को हल करने में असफल रहा है।

इस साल की थीम 'हां, हम टीबी को खत्म कर सकते हैं, लोगों की ताकत से' आशा और संभावना को दर्शाता है। लेकिन, जमीनी स्थिति में यह दिखता है कि विचार और कार्य में एक बड़ी खाई है। जब रोजाना 1,800 नए मामले सामने आते हैं और लगभग 140 लोग रोज मरते हैं, तो यह साफ है कि वर्तमान प्रयास पर्याप्त नहीं हैं।

डब्‍ल्‍यूएचओ के देश प्रतिनिधि के बयान के अनुसार, पाकिस्तान में हर दस मिनट में एक व्यक्ति टीबी से मरता है, जो तुरंत कदम उठाने की जरूरत को दर्शाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये मौतें रोकी जा सकती हैं, जो कि गुस्सा और जवाबदेही दोनों पैदा करती हैं।

फंड की भारी कमी, कमजोर स्वास्थ्य ढांचा और जरूरी दवाओं की कमी ने टीबी नियंत्रण के प्रयासों को कमजोर कर दिया है। ये नई समस्याएं नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान में सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र की पुरानी अनदेखी को दिखाती हैं।

टीबी जैसी संक्रामक बीमारियां सबसे कमजोर लोगों को प्रभावित करती हैं। टीबी को खत्म करने के लिए पाकिस्तान को राजनीतिक इच्छाशक्ति, ज्यादा पैसा और मजबूत स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की जरूरत है, जो दूर-दराज इलाकों तक भी पहुंचे। जल्दी पहचान, दवाओं की उपलब्धता और मरीजों का समर्थन सबसे जरूरी होना चाहिए।

इसके अलावा, लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाने चाहिए, ताकि टीबी के मरीज इलाज में हिचकिचाएं नहीं। (With inputs from IANS)

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