AIIMS में बाल चिकित्सा स्पाइन विकारों पर ऐतिहासिक वैश्विक सम्मेलन, भारत के लिए एक क्रांतिकारी पल

AIIMS नई दिल्ली 5वां एम्स इंटरनेशनल स्पाइन डिफॉरमिटी कोर्स और PSACON 2026 का आयोजन किया जा रहा है

Update: 2026-02-27 12:00 GMT

भारत की राजधानी दिल्ली इस समय बाल चिकित्सा स्पाइन केयर (Pediatric Spine Care) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पल की गवाह बन रही है. एम्स (AIIMS) नई दिल्ली के जवाहरलाल ऑडिटोरियम में 5वां एम्स इंटरनेशनल स्पाइन डिफॉरमिटी कोर्स और PSACON 2026 का आयोजन किया जा रहा है. 26 से 28 फरवरी तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन ने दुनिया के बेहतरीन स्पाइन सर्जनों, नवाचारों और शिक्षाविदों को एक मंच पर ला खड़ा किया है. एम्स के हड्डी रोग विभाग (Department of Orthopaedics), स्पाइन सोसाइटी (दिल्ली चैप्टर) और पीडियाट्रिक स्पाइन एकेडमी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की मुख्य थीम “इडियोपैथिक स्कोलियोसिस” (Idiopathic Scoliosis) है.

तकनीक और प्रतिभा का ग्लोबल संगम

इस वर्ष के वैज्ञानिक कार्यक्रम में भारत और दुनिया भर के प्रसिद्ध विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया है. इस सम्मेलन में स्पाइन केयर की अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जैसे:

  • मैग्नेटिकली कंट्रोल्ड ग्रोइंग रॉड्स (MCGR)-बच्चों की उम्र के साथ बढ़ने वाली विशेष रॉड्स.
  • रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी-रीढ़ की विकृति को ठीक करने के लिए रोबोट की मदद.
  • AI का उपयोग- स्कोलियोसिस के प्रबंधन और सर्जरी की योजना बनाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग.
  • टेदरिंग तकनीकृबहुत कम उम्र में होने वाले स्कोलियोसिस के इलाज के लिए आधुनिक विधि.

भारत के लिए पहली बार: शानदार नवाचारों का प्रदर्शन

आमतौर पर फिलाडेल्फिया, पेरिस और सियोल जैसे बड़े वैश्विक केंद्रों में दिखाई जाने वाली तकनीकों का प्रदर्शन अब नई दिल्ली में किया जा रहा है. इसमें 'शिला तकनीक' (Shilla technique) और 'मिनिमली इनवेसिव स्कोलियोसिस सर्जरी' (MISS) पर उच्च-स्तरीय बहस और वीडियो प्रदर्शन शामिल हैं. 150 से अधिक व्याख्यानों और केस चुनौतियों के साथ, यह सम्मेलन वैज्ञानिक गहराई के मामले में अभूतपूर्व है.

रीढ़ अनुसंधान में भारत का बढ़ता नेतृत्व

आयोजन अध्यक्ष प्रो. भावुक गर्ग के नेतृत्व में यह कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर बाल चिकित्सा स्पाइन रिसर्च में भारत के प्रभाव को बढ़ाता है. विंग कमांडर व्योमिका सिंह जैसे प्रेरणादायक वक्ताओं ने इस आयोजन के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है.

यह सम्मेलन क्यों महत्वपूर्ण है?

  • छोटे बच्चों में स्पाइन फ्यूजन (हड्डियों को जोड़ना) को टालने की रणनीतिया.
  • सर्जरी के दौरान होने वाली जटिलताओं का रीयल-टाइम समाधान.
  • बहुत कम उम्र में होने वाले स्कोलियोसिस का फेफड़ों (Pulmonary) पर प्रभाव और उसका इलाज.

भारतीय चिकित्सा के लिए गर्व का क्षण

विशेष रूप से बच्चों के रीढ़ के स्वास्थ्य पर केंद्रित इतने बड़े वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी करना भारत के लिए गर्व की बात है.एम्स अब सर्जिकल नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता के एक वैश्विक केंद्र के रूप में मजबूती से खड़ा है.

5वां एम्स इंटरनेशनल स्पाइन डिफॉरमिटी कोर्स इतिहास में उस पल के रूप में दर्ज होगा, जहां भारत बाल चिकित्सा स्कोलियोसिस देखभाल में एक 'ग्लोबल टॉर्चबियरर' (विश्व मार्गदर्शक) बनकर उभरा है.

Tags:    

Similar News