बच्चों में मानसिक बीमारी, माता-पिता के लिए चेलेंज, सही समय पर पहचानना जरूरी

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के संकेतों को पहचानना एक चैलेंज हो सकता है. सही समय पर जानना जरूरी है.

Update: 2026-02-04 06:15 GMT

अक्सर माता-पिता बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन उनके मानसिक स्वास्थ्य के संकेतों को पहचानना एक चैलेंज हो सकता है. बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य का मतलब है उनके सोचने, भावनाओं को संभालने और व्यवहार करने का बैलेंस. जब बच्चों के व्यवहार या सोचने के तरीके में ऐसे बदलाव आने लगें जो उनके स्कूल, घर या सामाजिक जीवन में बाधा डालें, तो यह मानसिक स्वास्थ्य विकार (Mental Health Disorder) का संकेत हो सकता है.

बच्चों में होने वाले कुछ सामान्य मानसिक विकार

  • एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorders)-इसमें बच्चे छोटी-छोटी बातों पर अत्यधिक डर या चिंता महसूस करते हैं, जिससे उनका खेलना या स्कूल जाना प्रभावित होता है.
  • ADHD-इसमें बच्चे एक जगह ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते, बहुत अधिक सक्रिय (Hyperactive) होते हैं और बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया देते हैं.
  • ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD)-यह आमतौर पर 3 साल की उम्र से पहले दिखाई देता है. इसमें बच्चों को दूसरों से बात करने और जुड़ने में कठिनाई होती है.
  • ईटिंग डिसऑर्डर-वजन कम करने या शरीर की बनावट को लेकर जुनूनी सोच रखना, जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है.
  • डिप्रेशन और मूड डिसऑर्डर-लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन और सामान्य गतिविधियों में रुचि खो देना। इसमें 'बाइपोलर डिसऑर्डर' भी शामिल है जहां मूड में भारी उतार-चढ़ाव आते हैं.
  • PTSD-किसी पुरानी चोट, हिंसा या दुर्व्यवहार की घटना के बाद लंबे समय तक डरावने सपने आना या घबराहट होना.

कब सतर्क होना जरूरी है?

  • दो सप्ताह से अधिक समय तक उदासी बनी रहना.
  • लोगों से कट जाना या सामाजिक गतिविधियों से दूर रहना.
  • खुद को नुकसान पहुँचाना या सुसाइड की बातें करना.
  • मूड में अचानक और बड़े बदलाव या आउट-ऑफ-कंट्रोल व्यवहार.
  • खान-पान की आदतों में बदलाव और वजन गिरना.
  • बार-बार सिरदर्द या पेट दर्द की शिकायत (बिना किसी शारीरिक बीमारी के).
  • स्कूल के प्रदर्शन में गिरावट या स्कूल जाने से मना करना.
  • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और नींद न आना.

निदान और उपचार (Diagnosis & Treatment)

  • अगर आपको संदेह है, तो सबसे पहले अपने पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) से बात करें. बच्चों में मानसिक बीमारी का निदान करने में समय लग सकता है क्योंकि छोटे बच्चे अपनी भावनाओं को शब्दों में नहीं समझा पाते.
  • साइकोथेरेपी (Talk Therapy)- इसमें विशेषज्ञ बच्चे से बात करते हैं या खेल-खेल में उनकी भावनाओं को समझने और बदलने की कोशिश करते हैं.
  • दवाएं-जरूरत पड़ने पर डॉक्टर एंटी-डिप्रेसेंट या अन्य दवाएं दे सकते हैं.

माता-पिता के रूप में आप कैसे मदद कर सकते हैं?

  • बीमारी के बारे में पढ़ें-जितना अधिक आप जानेंगे, उतना ही बेहतर तरीके से बच्चे का साथ दे पाएंगे.
  • तनाव प्रबंधन- शांत रहें और बच्चे के साथ मस्ती और आराम के पल बिताएं.
  • खूबियों की प्रशंसा करें-बच्चे की छोटी-छोटी सफलताओं और कौशल की तारीफ करें.
  • स्कूल का सहयोग लें-स्कूल के शिक्षकों से बात करें ताकि बच्चे को वहां भी सही माहौल मिल सके.
  • काउंसलिंग-'फैमिली काउंसलिंग' पर विचार करें ताकि परिवार का हर सदस्य बच्चे के ठीक होने में भागीदार बन सके.

हेल्पलाइन

टेली मानस: टोल-फ्री नंबर 14416 / 1-8008914416

वंद्रेवाला फाउंडेशन फॉर मेंटल हेल्‍थ 9999666555 या help@vandrevalafoundation.com

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(अगर आपको सहारे की ज़रूरत है या आप किसी ऐसे शख्‍स को जानते हैं, जिसे मदद की दरकार है, तो कृपया अपने नज़दीकी मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ के पास जाएं)

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