सरकारी प्रयासों और आम जन की भागीदारी से देश में घटे टीबी के मामले: जेपी नड्डा
24 मार्च को एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ विश्व क्षय रोग (TB) दिवस 2026 मनाया जा रहा है.
आज विश्व टीबी दिवस के अवसर पर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, श्री जगत प्रकाश नड्डा ने अपने लेख में #TBMuktBharat के संकल्प को दोहराया. जनभागीदारी, सशक्त स्वास्थ्य सेवाओं और निरंतर प्रयासों के माध्यम से, भारत टीबी उन्मूलन की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है. 24 मार्च को एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ विश्व क्षय रोग (TB) दिवस 2026 मनाया जा रहा है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियों, नई रणनीतियों और समुदाय के साथ मज़बूत जुड़ाव को प्रदर्शित करना है. यह कार्यक्रम "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'TB-मुक्त भारत' के विज़न के अनुरूप, TB के उन्मूलन की दिशा में भारत की तेज प्रगति को उजागर करेगा.
आज जब देश 'एक और टीबी मुक्त भारत अभियान 100 दिनों की मुहिम' शुरू कर रहा है, तब टीबी को खत्म करने की हमारी यात्रा को अत्यधिक गर्व और नई उम्मीद के साथ देखा जा सकता है. हाल के वर्षों में भारत की टीबी के खिलाफ प्रतिक्रिया अद्वितीय रही है. यह जन-भागीदारी पर आधारित है और इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित सामूहिक जिम्मेदारी की भावना समाहित है.
प्रमुख उपलब्धियां और आंकड़े
- मामलों में गिरावट-भारत में 2015 के मुकाबले टीबी की घटनाओं में 21 प्रतिशत और मृत्यु दर में 25 प्रतिशत की गिरावट आई है.
- व्यापक टेस्टिंग-हमारी रणनीति नए साक्ष्यों के साथ विकसित हुई है. देश में 20 करोड़ से अधिक टेस्ट किए गए, जिनमें 32.65 लाख टीबी के मामले पाए गए.
- बिना लक्षण वाले मामले-जांच में यह भी सामने आया कि 10.9 लाख केस ऐसे थे जिनमें टीबी के सामान्य लक्षण नहीं दिख रहे थे.
रणनीति और जन आंदोलन
जन आंदोलन-चिकित्सा अभियान अब एक जन आंदोलन बन गया है. जब विज्ञान, प्रणाली और समाज साथ काम करते हैं, तो बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं. युवाओं की भागीदारी-'मेरा भारत' कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही है. 2 लाख से अधिक स्वयंसेवकों ने टीबी मरीजों की मदद के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. अंतर्विभागीय सहयोग- स्वास्थ्य मंत्रालय ने 25 अन्य मंत्रालयों, पंचायती राज संस्थानों और सामुदायिक संगठनों के साथ हाथ मिलाया है.
भविष्य का लक्ष्य और तकनीक का उपयोग
अगले 100 दिनों के अभियान में 3000 से अधिक AI संचालित एक्स-रे उपकरणों और अगली पीढ़ी की डायग्नोस्टिक मशीनों को तैनात किया जाएगा. डेटा की मदद से उन गांवों और शहरों की पहचान की जाएगी जो ज्यादा जोखिम में हैं, ताकि वहां सघन जांच की जा सके. घनी आबादी वाली बस्तियों, प्रवासी श्रमिक समूहों और अन्य कमजोर आबादी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोविड-19 के खिलाफ रिकॉर्ड समय में एक अरब से अधिक लोगों का टीकाकरण किया. वही 'मेड इन इंडिया' और 'सबका साथ' वाली भावना अब टीबी मुक्त भारत के साझा मिशन में काम कर रही है. हमारा लक्ष्य है कि अगली पीढ़ी टीबी को केवल इतिहास के एक अध्याय के रूप में जाने, न कि अपने जीवन की वास्तविकता के रूप में.