क्या फूड लेबल पर लिखी कैलोरीज पर भरोसा किया जा सकता है, कितनी सही होती है ये सूचना, जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ
अक्सर जब आप खाने की चीजें खरीदते हैं तो उस पर न्यूट्रीशन वेल्यू लिखी होती है।
अक्सर जब आप खाने की चीजें खरीदते हैं तो उस पर न्यूट्रीशन वेल्यू लिखी होती है। खाने के पैकेट पर लिखी कैलोरीज की संख्या हमें यह बताती है कि उस भोजन से हमें कितनी ऊर्जा मिलेगी। लेकिन न्यूट्रिशन विशेषज्ञों के अनुसार, ये संख्या हमेशा पूरी तरह सटीक नहीं होती है। क्या इस तरह से दी गई जानकारी पर भरोसा किया जा सकता है, जानें-
क्यों पूरी तरह भरोसेमंद नहीं होती कैलोरी?
हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि हर व्यक्ति में अलग तरीके से खाना पचता है। कुछ लोगों की पाचन क्रिया बहुत तेज होती है तो वहीं कुछ की बहुत मंद। यही कारण है कि एक ही भोजन से अलग-अलग लोगों को अलग मात्रा में कैलोरी मिल सकती है। इसके अलावा कई अन्य कारण भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं जैसे खाना कैसे पकाया गया है, कितना प्रोसेस्ड है, और उसमें फाइबर कितना है — ये सब कैलोरी के असर को बदल देते हैं।
लेबल पर कैलोरी कैसे तय होती है?
आम तौर पर कंपनियां कैलोरी को एक तय वैज्ञानिक फॉर्मूला (Atwater system) से निकालती हैं। लेकिन यह सिर्फ एक अनुमान (estimate) होता है, जिसे बिल्कुल सटीक नहीं माना जा सकता। नियमों के अनुसार, इसमें हमेशा कुछ प्रतिशत तक गलती (variation) होने की गुंजाइश बनी रहती है।
वैज्ञानिक क्या कहते हैं?
वैज्ञानिक कहते हैं कि कैलोरी की मात्रा जो किसी फूड आइटम पर दी गई होती है, वह एक रफ गाइड होती है, न कि सटीक माप। शरीर असल में कितनी ऊर्जा उपयोग करता है, यह कई चीजों पर निर्भर करता है, जैसे- मेटाबॉलिज्म, गट बैक्टीरिया, खाने की क्वालिटी आदि।
समस्या कहाँ होती है?
फूड आइटम खरीदते हुए अक्सर लोग सिर्फ कैलोरी की संख्या देखकर खाना चुन लेते हैं। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि कम कैलोरी वाला खाना हेल्दी ही हो। कभी-कभी ज्यादा कैलोरी वाला खाना ज्यादा पौष्टिक हो सकता है।
क्या करना चाहिए?
जब भी फूड आइटम खरीदें तो सिर्फ कैलोरी पर ध्यान देने के बजाय ये भी जांच लें-
- पूरे पोषण (nutrition) को देखें और समझें कि भोजन में क्या न्यूट्रीशन वेल्यू है।
- प्रोसेस्ड फूड कम से कम खाएं।
- प्राकृतिक और संतुलित आहार लेने का प्रयास करें।
इस बात का ध्यान रखें
फूड लेबल पर लिखी कैलोरी की संख्या पूरी तरह गलत नहीं होती, लेकिन यह 100% सही भी नहीं होती है। इसे सिर्फ एक गाइडलाइन की तरह इस्तेमाल करना चाहिए, ना कि अंतिम सच मान लें।