क्या तनाव से आ सकते हैं मिर्गी के दौरे? जानिए फोकल एपिलेप्सी और स्ट्रेस का खतरनाक कनेक्शन: डा अर्पना गुप्ता

क्या तनाव मिर्गी का कारण बन सकता है?" इसका जवाब सीधा नहीं है. इसके कई कारण हैं.

Update: 2026-02-09 05:15 GMT

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का बोझ, पारिवारिक जिम्मेदारियां और कभी न रुकने वाली दुनिया के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश ने हमें मानसिक रूप से थका दिया है. हम जानते हैं कि पुराना तनाव (Chronic Stress) सिरदर्द, हाई बीपी और नींद की कमी का कारण बनता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह मिर्गी (Epilepsy) जैसी गंभीर स्थिति को भी उजागर कर सकता है.

अक्सर मरीज मुझसे पूछते हैं, "डॉक्टर, क्या तनाव मिर्गी का कारण बन सकता है?" इसका जवाब सीधा नहीं है. केवल तनाव एक स्वस्थ मस्तिष्क में मिर्गी पैदा नहीं करता, लेकिन यह उन लोगों में दौरे (Seizures) को शुरू करने वाला सबसे बड़ा 'ट्रिगर' जरूर है, जिनमें इसकी सुप्त संभावना होती है.

फोकल एपिलेप्सी (Focal Epilepsy) क्या है?

अक्सर लोग मिर्गी का मतलब पूरे शरीर का कांपना या बेहोश होकर गिरना समझते हैं. लेकिन 'फोकल एपिलेप्सी' इससे अलग और बहुत सूक्ष्म होती है. यह मस्तिष्क के एक खास हिस्से (Focus) से शुरू होती है, इसलिए इसके लक्षण अक्सर भ्रमित करने वाले होते हैं.

  • डेजा वू (Déjà Vu)-अचानक ऐसा महसूस होना कि यह स्थिति पहले भी घट चुकी है.
  • अजीब गंध या स्वाद-ऐसी गंध या स्वाद का अहसास होना जो वहां मौजूद नहीं है.
  • ज़ोनिंग आउट-कुछ सेकंड के लिए सुन्न हो जाना और किसी बात का जवाब न देना.
  • अनैच्छिक कंपन-शरीर के किसी एक अंग (हाथ या पैर) का अचानक कांपना.
  • डर या घबराहट-बिना किसी कारण के अचानक तीव्र डर महसूस होना.

ये घटनाएं बहुत कम समय के लिए होती हैं, लोग अक्सर इन्हें 'पैनिक अटैक' या 'थकान' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.

तनाव और दौरों का संबंध

हमारे दिमाग में एक 'सीजर थ्रेशोल्ड' (Seizure Threshold) यानी एक सीमा होती है. मिर्गी के मरीजों में यह सीमा कम होती है. आधुनिक तनावपूर्ण जीवन इसे और भी नीचे ले आता है. जब हम तनाव में होते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) जैसे हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो दिमाग की उत्तेजना को बढ़ा देते हैं. इसके साथ ही नींद की कमी (जो दौरों का सबसे बड़ा कारण है) और समय पर दवा न लेना एक ऐसी स्थिति पैदा करता है जहां दिमाग का संतुलन बिगड़ जाता है और दौरा पड़ जाता है.

आप क्या कर सकते हैं?

अगर आपको तनाव या थकान के समय अक्सर ऐसी अजीब अनुभूतियां होती हैं, तो उन्हें नजरअंदाज न करें। यह आपकी कमजोरी नहीं, बल्कि मस्तिष्क का एक जैविक संकेत है. नींद सबसे जरूरी है-एक स्वस्थ मस्तिष्क के लिए पर्याप्त नींद अनिवार्य है, इससे समझौता न करें. तनाव प्रबंधन-माइंडफुलनेस या ध्यान (Meditation) अपनाएं. नियमित आहार-हाइड्रेटेड रहें और समय पर भोजन करें. विशेषज्ञ की सलाह-लक्षणों को समझने के लिए एक न्यूरोलॉजिस्ट (Neurologist) से संपर्क करें.

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