नई दिल्ली: हम रोज़ जो खाना खा रहे हैं, वही धीरे-धीरे हमारी सेहत पर भारी पड़ सकता है। संसद में उठे एक सवाल के जवाब में Indian Council of Medical Research (ICMR) के आंकड़ों ने भारतीय डाइट को लेकर एक गंभीर तस्वीर सामने रखी है—जहां ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और कम प्रोटीन का असंतुलन कई बीमारियों की वजह बन रहा है।

कार्बोहाइड्रेट से भरी थाली: सबसे बड़ी चिंता

ICMR के भारत डायबिटीज (INDIAB) अध्ययन के अनुसार, भारतीयों की रोज़ाना कैलोरी का करीब 60–70% हिस्सा कार्बोहाइड्रेट से आता है। इसमें मुख्य रूप से सफेद चावल, गेहूं और चीनी जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं।

समस्या यह नहीं है कि हम कार्ब्स खा रहे हैं, बल्कि यह है कि हम कम गुणवत्ता वाले (refined) कार्ब्स ज्यादा खा रहे हैं, जिनमें पोषण कम होता है और जो जल्दी पचकर ब्लड शुगर बढ़ाते हैं।

कम प्रोटीन, ज्यादा जोखिम

स्टडी यह भी बताती है कि भारतीय डाइट में प्रोटीन की मात्रा अक्सर कम होती है, जबकि सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है। यह असंतुलन शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

इस तरह की डाइट को इन समस्याओं से जोड़ा गया है:


  • टाइप 2 डायबिटीज
  • पेट के आसपास चर्बी (एब्डॉमिनल ओबेसिटी)
  • अन्य मेटाबॉलिक बीमारियां

सीधे शब्दों में कहें तो आज की थाली, कल की बीमारी बन सकती है।

हर वर्ग में फैली समस्या

सबसे चिंता की बात यह है कि यह समस्या किसी एक शहर या उम्र तक सीमित नहीं है। यह पैटर्न शहरी और ग्रामीण—दोनों भारत में देखा जा रहा है। आज भी बड़ी संख्या में लोग रोज़ाना खाने में refined अनाज पर निर्भर हैं, जबकि दाल, दूध, अंडे और मेवे जैसे प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में नहीं लिए जा रहे।

धीरे-धीरे यह असंतुलन:

  • शरीर की ऊर्जा कम करता है
  • इम्युनिटी कमजोर करता है
  • और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो कम उम्र में ही डायबिटीज और मोटापे के मामले और तेजी से बढ़ सकते हैं।

अभी क्यों जरूरी है ध्यान देना?

यह मुद्दा संसद में सांसद संजय कुमार झा द्वारा उठाया गया, जो इस बात का संकेत है कि भारत में बदलती खान-पान की आदतें अब एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बन चुकी हैं। डायबिटीज और मोटापे के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह केवल लाइफस्टाइल का मामला नहीं, बल्कि एक पब्लिक हेल्थ चैलेंज बन चुका है।

सरकार क्या कर रही है?

संसद में संजय झा के प्रश्नों का उत्तर में स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम गिनाए हैं:

  • Eat Right Movement (FSSAI): लोगों को कम नमक, चीनी और फैट वाला खाना अपनाने के लिए जागरूक करना
  • Fit India Movement: लोगों को एक्टिव और फिट रहने के लिए प्रेरित करना
  • National Health Mission (NHM): महिलाओं, बच्चों और किशोरों के पोषण पर फोकस
  • NP-NCD प्रोग्राम: लाइफस्टाइल बीमारियों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान
  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर: जमीनी स्तर पर हेल्दी लाइफस्टाइल को बढ़ावा

इन सभी प्रयासों का उद्देश्य लोगों को संतुलित और स्वस्थ खान-पान की ओर ले जाना है।

ICMR की स्टडी एक साफ संदेश देती है कि भारत को सिर्फ पेट भरने वाला नहीं, बल्कि संतुलित और पोषक खाना चाहिए।छोटे-छोटे बदलाव भी लंबे समय में बड़ी बीमारियों से बचा सकते हैं। एक हेल्दी थाली के लिए जरूरी है:

  1. रिफाइंड कार्ब्स कम करना
  2. प्रोटीन बढ़ाना
  3. अनहेल्दी फैट सीमित करना

भारत की डाइट अब एक मोड़ पर खड़ी है। पारंपरिक खाना हमेशा संतुलित माना जाता था, लेकिन बदलती आदतें इस संतुलन को बिगाड़ रही हैं। समाधान मुश्किल नहीं है—बस जरूरत है जागरूकता, सही चुनाव और लगातार प्रयास की। क्योंकि सेहत की शुरुआत आपकी थाली से ही होती है।

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ICMR की स्टडी के मुताबिक भारतीय डाइट में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और कम प्रोटीन का असंतुलन डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ा रहा है।
Arti Mishra
Arti Mishra

Arti Mishra has nearly one and a half decades of experience in journalism. She has extensive experience writing on topics related to health, food, lifestyle, fashion, beauty, relationships, religion, and astrology. She holds a PG Diploma in Journalism from YMCA. She began her career in print journalism and has worked in both feature writing and the news section. Over the years, she has worked with prominent media organisations including Zee News, Aaj Tak, Hindustan, Amar Ujala, and contributed for many publishers like NDTV.