चैत्र नवरात्र: पूजा के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद है दूब घास, जानें इसके लाभ
चैत्र नवरात्र में दूब घास की महत्ता बढ़ जाती है क्योंकि बिना दूब घास के मां जगदम्बा का पूजन भी अधूरा है।
नई दिल्ली: चैत्र नवरात्र के दौरान दूब घास का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसके बिना मां जगदम्बा की पूजा अधूरी मानी जाती है।मां को चैत्र नवरात्र में दूब घास अर्पित की जाती है। घर में कन्या पूजन के समय भी दूब घास का इस्तेमाल पैर छूने में किया जाता है। दूब के आध्यात्मिक महत्व के बारे में सभी जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि दूब घास का इस्तेमाल शरीर को आंतरिक और बाहरी पोषण प्रदान करता है।
आयुर्वेद में दूब घास को 'अमृता' की उपाधि दी गई है। इसके गुण न सिर्फ मनुष्यों के लिए, बल्कि बहुत पशुओं के लिए भी लाभकारी हैं। दूब घास को कफ और वात को संतुलित करने वाली औषधि माना गया है। अगर शरीर में वात और कफ असंतुलन हैं, तो इसका सेवन दोषों को संतुलित करता है, लेकिन इसके प्रयोग से पहले उसके आंतरिक और बाहरी उपयोग के गुणों को भी जानना जरूरी है।
पहले बात करते हैं बाहरी उपयोग की। दूब घास में रक्त को रोकने की क्षमता होता है। अगर चोट लग जाने पर रक्त नहीं रुक रहा है या पुराने घाव में रुक-रुककर खून आता है, तो दूब घास का लेप किया जा सकता है। यह रक्त को रोकने के साथ घाव को भरने में भी मदद करेगा और संक्रमण से भी बचाएगा। गर्मियों के शुरुआत के साथ ही लोगों के नाक से खून आने और सिरदर्द की समस्या भी आम है। ऐसे में दूब का रस नाक में डालने से आराम मिलता है। इसके साथ ही मुल्तानी मिट्टी को भिगोकर उसे सूंघ भी सकते हैं। इसके अलावा, अगर गर्मियों में त्वचा जलने लगती है, तब भी दूब का लेप का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अब बात करते हैं इसके आंतरिक उपयोग की। दूब घास का सेवन पेट संबंधी परेशानियों में और मासिक धर्म में होने वाले दर्द के लिए किया जा सकता है। इसके लिए डॉक्टरी सलाह के बाद ही दूब के रस का सेवन करें। (With inputs from IANS)