मरुआ खांसी और गले की खराश कम करने में मददगार, मुंह की दुर्गंध को करता है दूर
मरुआ एक प्राकृतिक उपाय है, जो खांसी और गले की खराश को कम करके मुंह की दुर्गंध दूर करता है।
नई दिल्ली: मरुआ एक बहुमूल्य आयुर्वेदिक पौधा है, जो शरीर को अंदर और बाहर दोनों तरह से स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसके पत्तों में पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, फाइबर, प्रोटीन, मैग्नीशियम और विटामिन बी6 भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, इसलिए इसे आयुर्वेद में विशेष महत्व दिया गया है।
सर्दियों में अक्सर लोगों को सर्दी-जुकाम, खांसी या कफ जैसी परेशानियाँ होती हैं, और मरुआ इन सभी समस्याओं को कम करने में सहायक है। मरुआ की पत्तियों को चाय में डालकर पीने से गले की खराश और खांसी में राहत मिलती है। इसमें आप थोड़ी मुलेठी भी मिला सकते हैं, जो खांसी और गले की जलन को और अधिक कम करने में मदद करती है।
बच्चों के लिए भी मरुआ बहुत फायदेमंद है। इसकी चटनी पेट के कीड़ों को दूर करने में मदद करती है। आप मरुआ की पत्तियों को पीसकर हल्की चटनी बना सकते हैं और बच्चों को दे सकते हैं। इससे पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। पत्तों और अदरक को मिलाकर बनाई गई चटनी भोजन के साथ लेने से पेट हल्का रहता है और खाना आसानी से पचता है।
कफ या बलगम की समस्या वाले लोगों के लिए मरुआ का काढ़ा बेहद उपयोगी है। इसका सेवन गले और फेफड़ों में जमा बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है और खांसी में राहत देता है। इसके अलावा, मरुआ की पत्तियाँ मुंह की बदबू और मसूड़ों की कमजोरी को भी कम करती हैं। इसके लिए पत्तियों को चबाकर थूक दें, जिससे मुंह की दुर्गंध और मसूड़ों की समस्याएँ दूर होती हैं।
ध्यान दें कि मरुआ का सेवन करने से पहले किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा उचित होता है। नियमित और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर मरुआ शरीर को पोषण देता है, प्रतिरक्षा को मजबूत करता है और सर्दियों में स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करता है। (With inputs from IANS)