कमजोर हो रही हैं आंखें? इन आयुर्वेदिक नेत्र व्यायामों से बढ़ाएं रोशनी
आयुर्वेदिक नेत्र व्यायामों से आंखों की रोशनी बढ़ाई और नेत्र स्वास्थ्य सुधारा जा सकता है।
नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं। लगातार स्क्रीन देखने की वजह से आंखों में जलन, भारीपन, धुंधलापन और धीरे-धीरे रोशनी कमजोर होना आम समस्या बन गई है। कई लोग कम उम्र में ही चश्मे पर निर्भर हो रहे हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, जैसे शरीर के अन्य अंगों को व्यायाम की जरूरत होती है, वैसे ही आंखों को भी नियमित अभ्यास से स्वस्थ रखा जा सकता है। सही नेत्र व्यायाम आंखों की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं और थकान कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद के मुताबिक आंखें तेजस तत्व से जुड़ी होती हैं और गलत दिनचर्या, देर रात तक जागना, ज्यादा स्क्रीन टाइम और तनाव पित्त दोष को बढ़ाकर आंखों पर प्रतिकूल असर डालते हैं।
नेत्र व्यायाम रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं, जिससे आंखों तक ऑक्सीजन और पोषण सही तरीके से पहुंचता है और आंखों की कार्यक्षमता लंबे समय तक बनी रहती है। सबसे सरल और असरदार अभ्यास है पलक झपकाना: सीधे बैठकर 20 बार तेजी से पलकें झपकाएं, फिर आंखें बंद करके 10 सेकंड आराम दें। यह आंखों की ड्राइनेस और थकान को कम करता है।
ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं देखना आंखों की मांसपेशियों को मजबूत करता है। आंखों को गोल-गोल घुमाने से जकड़न कम होती है। त्राटक क्रिया भी महत्वपूर्ण है: किसी दीपक या मोमबत्ती की लौ को 30–60 सेकंड तक बिना पलक झपकाए देखें, जिससे एकाग्रता और रोशनी बढ़ती है। इसके अलावा सुबह ठंडे पानी से आंखें धोना, गुलाब जल से सफाई करना और सप्ताह में दो बार त्रिफला जल से नेत्र प्रक्षालन करना लाभकारी है।
छोटे-छोटे जीवनशैली बदलाव भी जरूरी हैं: हर 20 मिनट में स्क्रीन से ब्रेक लें, पर्याप्त नींद लें, हरी सब्जियां और फल खाएं और रोज कुछ समय खुले आसमान की ओर देखें। (With inputs from IANS)