विटामिन के की कमी शरीर के लिए खतरे की घंटी, हार्ट डिजीज बढ़ने की रहती हैं आशंका
विटामिन K की कमी से खून का थक्का जमने में समस्या आ सकती है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
नई दिल्ली: आमतौर पर जब स्वास्थ्य खराब होता है तो लोग कैल्शियम, आयरन या विटामिन डी की कमी पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक और जरूरी पोषक तत्व है जिसकी अनदेखी गंभीर परिणाम दे सकती है—विटामिन K। यह विटामिन शरीर में खून का थक्का जमाने, हड्डियों को मजबूत रखने और दिल की धमनियों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर समस्याएं धीरे-धीरे सामने आने लगती हैं।
विटामिन K एक वसा में घुलनशील (फैट सॉल्युबल) विटामिन है, जो शरीर में कई जरूरी प्रोटीन को सक्रिय करता है। ये प्रोटीन चोट लगने पर खून का बहाव रोकने में मदद करते हैं। यदि शरीर में इसकी कमी हो जाए तो छोटी-सी चोट भी अधिक रक्तस्राव का कारण बन सकती है। बार-बार नाक से खून आना, मसूड़ों से खून बहना या शरीर पर आसानी से नीले निशान पड़ना इसके संकेत हो सकते हैं।
यह विटामिन हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह ऑस्टियोकैल्सिन नामक प्रोटीन को सक्रिय करता है, जो कैल्शियम को हड्डियों से जोड़ने में सहायक होता है। जब विटामिन K पर्याप्त मात्रा में नहीं होता, तो कैल्शियम का सही उपयोग नहीं हो पाता और हड्डियां कमजोर पड़ने लगती हैं, जिससे आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है।
विटामिन K का संबंध हृदय स्वास्थ्य से भी है। यह धमनियों में कैल्शियम के अनावश्यक जमाव को रोकता है। इसकी कमी होने पर धमनियां कठोर हो सकती हैं, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ जाता है।
नवजात शिशुओं के लिए यह विटामिन विशेष रूप से आवश्यक है। जन्म के समय उनके शरीर में विटामिन K का स्तर कम होता है और आंतों में इसे बनाने वाले बैक्टीरिया भी विकसित नहीं हुए होते। ऐसी स्थिति में हेमोरेजिक डिजीज ऑफ द न्यूबॉर्न का खतरा रहता है, जिसमें आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है। इसी कारण जन्म के तुरंत बाद शिशुओं को विटामिन K का इंजेक्शन दिया जाता है, ताकि उन्हें इस गंभीर खतरे से बचाया जा सके। (With inputs from IANS)