दांतों के लिए साइलेंट किलर है सड़न, जानें कब बढ़ सकती है दांतों से जुड़ी समस्याएं
दांतों की सड़न धीरे-धीरे उनकी सेहत को नुकसान पहुंचाती है और समय रहते इलाज न करने पर गंभीर समस्याएं बढ़ सकती हैं।
नई दिल्ली: दांतों में दर्द या सूजन पर तो लोग ध्यान देते हैं, लेकिन सड़न धीरे-धीरे दांतों को नुकसान पहुंचाती है और अक्सर तब तक पता नहीं चलता जब तक संक्रमण गंभीर रूप न ले ले। बाहर से चमकदार दिखने वाले दांतों में अंदरूनी छेद बनना आम है, और यह प्रक्रिया दर्द महसूस होने तक लगातार बढ़ती रहती है।
सड़न के कारण
दांतों में सड़न के मुख्य कारण हैं:
- ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड खाना
- सही तरीके से ब्रश या कुल्ला न करना
- मुंह में लार की कमी
- कैल्शियम और विटामिन डी की कमी
- रात में बिना ब्रश किए सोना
- ये सभी कारक बैक्टीरिया के विकास और दांतों में सड़न को बढ़ावा देते हैं।
आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय
- लौंग का तेल
- दांतों में दर्द कम करने और बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- रात में कुछ समय के लिए दांतों पर लगाकर छोड़ें और फिर पानी से साफ करें।
- नीम से दातुन या कुल्ला
- नीम प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुणों से दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखता है।
- रोजाना दातुन या नीम की चाय से कुल्ला करने से संक्रमण कम होता है।
- नारियल तेल से ऑयल पुलिंग
- तेल दांतों के कोनों में जाकर गंदगी और पीलेपन को साफ करता है।
- इसे 5 मिनट तक मुंह में घुमाएं और फिर कुल्ला करें।
- नमक और सरसों के तेल का मिश्रण
- दांतों के दर्द में राहत देता है और बैक्टीरिया को नष्ट करता है।
- हफ्ते में तीन बार इस्तेमाल करने से दांतों की पीलापन कम होता है।
पोषण और आहार संबंधी सुझाव
- कैल्शियम और विटामिन डी: दांतों को मजबूत बनाने और मसूड़ों से खून आने की समस्या कम करने में मदद करते हैं।
- विटामिन सी: मसूड़ों और दांतों की सेहत के लिए जरूरी, रोजाना खट्टे फल का सेवन लाभकारी है।
- संतुलित आहार और पर्याप्त हाइड्रेशन से दांतों की लंबी उम्र सुनिश्चित की जा सकती है।
निष्कर्ष
दांतों की सड़न धीरे-धीरे बढ़ती है और समय रहते रोकना जरूरी है। घरेलू उपाय, आयुर्वेदिक नुस्खे और सही पोषण से दांत और मसूड़ों को स्वस्थ रखा जा सकता है। नियमित ब्रशिंग, कुल्ला, और सही जीवनशैली अपनाना दांतों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। (With inputs from IANS)