प्री-डायबिटीज रोगी हैं तो घबराएं नहीं, इन तरीकों से कर सकते हैं इसे रिवर्स
डायबिटीज ऐसी बीमारी है, जिसे रिवर्स करना बहुत कठिन है। लेकिन प्री-डायबिटीज को रिवर्स किया जा सकता हे।
डायबिटीज ऐसी बीमारी है, जिसे रिवर्स करना बहुत कठिन है। लेकिन प्री-डायबिटीज को रिवर्स किया जा सकता हे। डॉक्टर्स कहते हैं कि प्री-डायबिटीज की स्थिति में कोई भी व्यक्ति लाइफस्टाइल, खानपान में बदलाव करके इसे कंट्रोल कर सकता है। जानें क्या है प्री-डायबिटीज, कैसे पता चलता है कि प्री-डायबिटीज की स्थिति है और कैसे इसे रिवर्स किया जा सकता है।
प्री-डायबिटीज क्या है
शायद आपको ये जानकर हैरानी होगी कि दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्री-डायबिटीज है। प्री-डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल, नॉर्मल स्तर से ज्यादा होता है. यानी नॉर्मल से ज्यादा लेकिन डायबिटीज की स्थिति से कम। यानी बॉर्डर लाइन या इसके थोड़ा ऊपर होता है। प्री-डायबिटीज की स्थिति में सेहत का ख्याल ना रखा जाए तो यह डायबिटीज में बदल जाता है।
प्री-डायबिटीज के लक्षण
प्री-डायबिटीज के लक्षण डायबिटीज के लक्षणों के समान ही होते हैं. जैसे बहुत अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब का आना, बहुत अधिक थकान महसूस होना। अचानक वजन का बढ़ना, जिसमें बैली फैट अधिक दिखे, त्वचा के रंग में बदलाव होना जैसे गर्दन में काले धब्बे दिखना, धुंधली दृष्टि हो जाना, अचानक से अधिक भूख लगना।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
अहमदाबाद के नारायणा अस्पताल के Diabetologist डॉक्टर जूजेर रंगवाला कहते हैं,
प्री-डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का ब्लड शुगर स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन इतना ज्यादा नहीं कि उसे टाइप-2 डायबिटीज कहा जाए। यह स्थिति इस बात का संकेत होती है कि यदि समय रहते जीवनशैली में बदलाव नहीं किए गए तो भविष्य में डायबिटीज होने का खतरा बढ़ सकता है।
डॉक्टर जूजेर रंगवाला के अनुसार प्री-डायबिटीज को रिवर्स ऐसे किया जा सकता है-
1. वजन नियंत्रित रखें
यदि व्यक्ति का वजन अधिक है, तो शरीर के वजन का लगभग 5–10% कम करना भी ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
2. नियमित शारीरिक गतिविधि करें
सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम व्यायाम गतिविधि जैसे तेज चलना, जॉगिंग या योग ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद करती है।
3. हेल्दी डाइट अपनाएं
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, मीठे पेय और प्रोसेस्ड फूड कम करें। फाइबर से भरपूर भोजन, साबुत अनाज, फल और सब्जियां अधिक शामिल करें।
4. पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण
नींद की कमी और ज्यादा तनाव शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए नींद और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है।
5. नियमित ब्लड शुगर जांच
समय-समय पर ब्लड शुगर टेस्ट कराते रहना जरूरी है ताकि स्थिति पर नजर रखी जा सके और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह ली जा सके।