नैपकिन से कप तक: कर्नाटक ने मासिक धर्म स्वच्छता योजना में किया बदलाव – डॉ कविता कोवी
कर्नाटक सरकार ने स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियों के लिए अपनी मासिक धर्म स्वच्छता योजना में बड़ा बदलाव करने की घोषणा की है। अब पारंपरिक डिस्पोजेबल सैनिटरी नैपकिन के साथ-साथ पुन: उपयोग योग्य मेंस्ट्रुअल कप को भी अपनी प्रमुख ‘शुचि’ योजना में शामिल किया जाएगा।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी हालिया सरकारी आदेश के अनुसार, 2025–26 शैक्षणिक वर्ष में कक्षा 6 से 12 तक की 19,64,507 छात्राएं इस योजना की लाभार्थी हैं, जो पहले केवल मुफ्त सैनिटरी नैपकिन तक सीमित थी।
संशोधित प्रशासनिक मंजूरी के तहत अब इस योजना में मेंस्ट्रुअल कप को एक टिकाऊ और किफायती विकल्प के रूप में शामिल किया गया है। नई योजना के अंतर्गत 10.38 लाख से अधिक मेंस्ट्रुअल कप खरीदे जाएंगे, जिनकी अनुमानित लागत ₹61 करोड़ से अधिक होगी। इनकी खरीद और वितरण स्वच्छ भारत अभियान के तहत कर्नाटक स्टेट मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य डिस्पोजेबल मासिक धर्म उत्पादों पर राज्य की निर्भरता कम करना है, जो न केवल लगातार खर्च बढ़ाते हैं बल्कि बड़े पैमाने पर कचरा भी पैदा करते हैं। वर्तमान में कर्नाटक शुचि योजना के तहत लगभग 2.35 करोड़ सैनिटरी नैपकिन वितरित करने पर हर साल करीब ₹71 करोड़ खर्च करता है। इनमें से कुछ हिस्से को मेंस्ट्रुअल कप से बदलने पर लगभग ₹10 करोड़ की वार्षिक बचत हो सकती है, साथ ही नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे में भी कमी आएगी।
कार्यान्वयन योजना के तहत, वर्ष के शेष तीन महीनों तक सैनिटरी नैपकिन का वितरण जारी रहेगा ताकि संक्रमण सुचारु रूप से हो सके। अगले शैक्षणिक वर्ष से प्रत्येक लाभार्थी को मासिक धर्म स्वच्छता सहायता के रूप में एक मेंस्ट्रुअल कप दिया जाएगा।
मेंस्ट्रुअल कप पुन: उपयोग योग्य स्वच्छता उपकरण हैं, जिन्हें हर चक्र के बाद साफ कर सुरक्षित रूप से दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे ये सिंगल-यूज़ उत्पादों की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ विकल्प बनते हैं। सरकार ने इस पहल को लड़कियों को बेहतर मासिक धर्म प्रबंधन के लिए सशक्त बनाने और राज्य के दीर्घकालिक खर्च को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
यह बदलाव कर्नाटक की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में टिकाऊ मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रथाओं की ओर एक व्यापक बदलाव को दर्शाता है, जिसमें आर्थिक बचत के साथ-साथ पर्यावरण और स्वच्छता के लाभ भी शामिल हैं।
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