भुजबन्ध-शक्ति-विकासक योग से कंधों और हाथों को मजबूती, शरीर में ऊर्जा

आज की भागदौड़ भरी और अनियमित जीवनशैली शरीर को बीमारियों की ओर धकेल रही है। लेकिन रोज़ाना योगासन करने से सेहत को बेहतर रखा जा सकता है।

Update: 2026-02-03 06:15 GMT

आज की तेज़ रफ्तार और अनियमित जीवनशैली का सीधा असर हमारे शरीर और मन पर पड़ रहा है। लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता तनाव शरीर को धीरे-धीरे कमजोर बना देता है। ऐसे में खुद को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए रोज़ाना योग का अभ्यास बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। योग न केवल शरीर को मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक शांति और संतुलन भी देता है।

इन्हीं सरल लेकिन प्रभावी योग अभ्यासों में से एक है भुजबन्ध-शक्ति-विकासक। यह योग क्रिया विशेष रूप से कंधों, भुजाओं और शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए जानी जाती है। इसे रोज़मर्रा की दिनचर्या में शामिल करने से शरीर में ताकत के साथ-साथ फुर्ती और ताजगी भी महसूस होती है। नियमित अभ्यास करने से मन भी शांत रहता है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है।

भुजबन्ध-शक्ति-विकासक अभ्यास में हाथों और कंधों की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जिससे उनकी शक्ति और लचीलापन बढ़ता है। यह ऊपरी शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जिससे मांसपेशियों में जकड़न कम होती है और थकान दूर होती है। जो लोग लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करते हैं या जिनके कंधों और हाथों में अकड़न या दर्द रहता है, उनके लिए यह योग अभ्यास खास तौर पर लाभकारी माना जाता है।

इस योग क्रिया की खास बात यह है कि इसे घर पर बहुत आसानी से किया जा सकता है और इसके लिए किसी तरह के उपकरण की जरूरत नहीं होती। अभ्यास शुरू करने के लिए सबसे पहले दोनों पैरों को मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं। शरीर को ढीला और तनावमुक्त रखें। अब दोनों हाथों की मुट्ठियां बांध लें। इसके बाद दोनों भुजाओं को कोहनी से मोड़ें, ताकि कोहनी और कंधे के बीच लगभग 90 डिग्री का कोण बन जाए। अब मुट्ठियों को एक सीध में रखते हुए दोनों हाथों को तेज़ गति से छाती के सामने लाएं और फिर पीछे की ओर ले जाएं। इस क्रिया को आगे-पीछे लगातार दोहराएं। शुरुआत में इसे 20 से 30 बार करें और अभ्यास बढ़ने के साथ धीरे-धीरे इसकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।

भुजबन्ध-शक्ति-विकासक के नियमित अभ्यास से कई फायदे मिलते हैं। इससे कंधों और भुजाओं की मांसपेशियां मजबूत और सुडौल बनती हैं। ऊपरी शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ने से सुस्ती और थकान कम होती है। कंधों के दर्द और जकड़न से राहत मिलती है। शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ता है और रोज़मर्रा के कामों में फुर्ती महसूस होती है। साथ ही, हाथों की ताकत बढ़ने से शरीर की मुद्रा यानी पोश्चर भी बेहतर होती है।

कुल मिलाकर, भुजबन्ध-शक्ति-विकासक एक आसान, सुरक्षित और प्रभावी योग अभ्यास है। यदि इसे रोज़ाना कुछ मिनटों के लिए किया जाए, तो यह शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

With Inputs From IANS

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