Organ Donation: RML अस्पताल में ब्रेन डेड महिला ने 3 लोगों को दिया जीवनदान, ग्रीन कॉरिडोर और एयर एंबुलेंस से पहुंचाए गए अंग

डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों ने अंगदान की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है.

Update: 2026-04-13 05:45 GMT

अंगदान को महादान कहा जाता है और दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के डॉक्टरों ने इसे एक बार फिर साबित कर दिखाया है. एक 45 साल की ब्रेन डेड महिला के अंगों ने तीन गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को नई जिंदगी दी है. संस्थान की ओर से किया गया यह छठा 'मल्टी ऑर्गन रिट्राइवल' (Multi-Organ Retrieval) है, जो चिकित्सा जगत और मानवता के लिए एक बड़ी मिसाल है. डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों ने अंगदान की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. सेरेब्रल हैमरेज (Cerebral Hemorrhage) के कारण ब्रेन डेड घोषित की गई एक 45 साल की महिला के परिजनों ने अंगदान का साहसिक फैसला लिया, जिसके बाद महिला के दिल, लिवर और किडनी को सफलतापूर्वक जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया.

किन मरीजों को मिला नया जीवन?

  • महिला के अंगों को नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTO) के दिशा-निर्देशों के तहत तीन अलग-अलग संस्थानों में भेजा गया. किडनी: एक किडनी को RML अस्पताल के ही नेफ्रोलॉजी विभाग के एक मरीज को प्रत्यारोपित किया गया.
  • दिल: लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई (SGPGI) में इलाज करा रहे हृदय रोग के मरीज के लिए दिल को एयर एंबुलेंस के जरिए भेजा गया.
  • लिवर: लिवर को दिल्ली कैंट स्थित आरआर (RR) हॉस्पिटल भेजा गया, जिसके लिए दिल्ली पुलिस के सहयोग से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया ताकि बिना ट्रैफिक रुकावट के अंग समय पर पहुंच सके.

कैसे पूरी हुई यह जटिल प्रक्रिया?

अस्पताल के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग ने जब महिला को ब्रेन डेड पाया, तो उनके परिजनों से संपर्क किया गया. परिजनों की सहमति मिलने के बाद, तड़के सुबह 3:30 बजे अलग-अलग विभागों की टीमों (एनेस्थीसिया, सीटीवीएस और यूरोलॉजी) ने अंगों को रिट्राइव करने का काम शुरू किया. संस्थान के निदेशक और मेडिकल सुप्रीटेंडेंट की देखरेख में पूरी प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी और तेजी के साथ पूरा किया गया.

क्या होता है 'ब्रेन डेड' और अंगदान का महत्व?

  • ब्रेन डेड एक ऐसी अवस्था है जिसमें व्यक्ति का मस्तिष्क पूरी तरह और स्थायी रूप से काम करना बंद कर देता है, लेकिन कृत्रिम सपोर्ट (वेंटिलेटर) के जरिए हृदय और अन्य अंग कुछ समय तक सक्रिय रखे जा सकते हैं.
  • समय की महत्ता: लिवर, किडनी और दिल जैसे अंगों को रिट्राइव करने के बाद बहुत कम समय के भीतर प्रत्यारोपित करना जरूरी होता है.
  • अंगों का संरक्षण: त्वचा और पैंक्रियाज जैसे अंगों को संरक्षित कर बाद में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

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