शीतकारी प्राणायाम से करें हाई BP कंट्रोल, जानें सही तरीका

खराब जीवनशैली और खानपान के कारण हाई ब्लड प्रेशर आम हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं के साथ योग, खासकर शीतकारी प्राणायाम, इसे नियंत्रित करने में मददगार है।

Update: 2026-04-13 05:00 GMT

बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या और असंतुलित खानपान के कारण आज हाई ब्लड प्रेशर एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या बन गई है। दुनियाभर में लगभग एक अरब लोग इससे प्रभावित हैं, जबकि भारत में इसे हृदय रोग और स्ट्रोक का एक प्रमुख कारण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं के साथ जीवनशैली में सुधार और नियमित योग अभ्यास से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है। विशेष रूप से शीतकारी प्राणायाम एक सरल और प्रभावी श्वास तकनीक है, जो हाई ब्लड प्रेशर कम करने में मददगार साबित हो रही है।

शीतकारी प्राणायाम के अभ्यास से सेहत को कई लाभ मिलते हैं। यह हाई ब्लड प्रेशर को कम करता है और हृदय की धड़कन को स्थिर बनाए रखता है। साथ ही यह तनाव और चिंता को घटाता है, जिससे ब्लड प्रेशर पर सकारात्मक असर पड़ता है। यह शरीर में ठंडक पैदा करता है, पित्त दोष को शांत करता है और गर्मी से जुड़ी समस्याओं में राहत देता है। इसके अभ्यास से श्वास दर धीमी होती है, ऑक्सीजन का बेहतर उपयोग होता है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता, इसलिए इसे दवाओं के साथ पूरक चिकित्सा के रूप में सुरक्षित तरीके से रोजाना किया जा सकता है।

रिसर्च के अनुसार, शीतकारी और शीतली प्राणायाम हल्के से मध्यम हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों में सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को काफी हद तक कम कर सकते हैं। यह बदलाव तनाव में कमी और पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम के सक्रिय होने के कारण होता है।

शीतकारी प्राणायाम करने के लिए आरामदायक ध्यान मुद्रा में बैठें। पीठ सीधी रखें और आंखें बंद कर लें। इसके बाद हाथों को घुटनों पर रखें। निचले और ऊपरी दांतों को हल्के से दबाएं और होंठों को थोड़ा खुला रखें। दांतों के बीच से धीरे-धीरे सांस अंदर लें और हवा की आवाज पर ध्यान दें। सांस लेने के बाद मुंह बंद कर लें और नाक से धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें। इस अभ्यास को रोजाना लगभग 10 मिनट तक करें और शुरुआत में 20 से 30 दिनों तक नियमित रूप से अभ्यास करें।

योग विशेषज्ञों का मानना है कि प्राणायाम जैसी सरल तकनीकें दवाओं के साथ मिलकर ब्लड प्रेशर को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकती हैं और हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकती हैं। नियमित अभ्यास से न केवल रक्तचाप नियंत्रित रहता है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। हाई ब्लड प्रेशर से परेशान लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ा सकते हैं, हालांकि कुछ सावधानियां जरूरी हैं। मरीज डॉक्टर की सलाह से ही योग शुरू करें। सर्दी, साइनस या सांस संबंधी समस्या होने पर सावधानी बरतें। गर्भवती महिलाएं और गंभीर रोगी विशेषज्ञ की सलाह के बिना इसका अभ्यास न करें।

With Inputs From IANS

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