वोमिटिंग के कारण और आयुर्वेदिक तरीके से इसे कैसे रोकें
उल्टी किसी भी उम्र के लोगों में आम और असुविधाजनक समस्या है। यह कभी हल्की पेट की परेशानी, तो कभी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है।
उल्टी या वॉमिटिंग किसी भी उम्र के लोगों के लिए आम और असुविधाजनक समस्या है। कभी-कभी यह हल्की पेट की परेशानी की वजह से होती है, तो कभी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है। इसलिए इसके कारणों को समझना और समय पर सही इलाज करना जरूरी है।
उल्टी के सबसे आम कारणों में पेट संबंधी समस्याएं शामिल हैं, जैसे भोजन का ठीक से न पचना, जले हुए या अधिक मसाले वाले भोजन से पेट का परेशान होना, या खाने में बैक्टीरिया और वायरस के कारण इंफेक्शन। इसके अलावा गैस, एसिडिटी, फूड पॉइज़निंग, सिरदर्द, माइग्रेन, अधिक तनाव या अचानक किसी गंध या खाने की चीज से मिचली आ सकती है।
शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी उल्टी का बड़ा कारण हो सकता है। यह बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि उनका शरीर जल्दी कमजोर पड़ जाता है। महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से सुबह-सुबह मिचली और उल्टी होना आम है।
आयुर्वेद के अनुसार, उल्टी वायु, पित्त और कफ के असंतुलन से भी हो सकती है। आयुर्वेदिक उपायों में सबसे पहले शरीर को हाइड्रेट रखना और हल्का खाना खाना जरूरी माना गया है। नारियल पानी में थोड़ा इलायची पाउडर मिलाकर धीरे-धीरे पीना पेट और पाचन तंत्र दोनों के लिए आरामदायक होता है। अदरक की गर्म चाय से मिचली कम होती है और पेट शांत रहता है।
हल्का और आसान खाना जैसे उबला या पफ्ड राइस, या चावल का पानी भी फायदेमंद है। इसके अलावा घर पर बने ओआरएस (स्वच्छ पानी, नमक और चीनी मिलाकर) का सेवन धीरे-धीरे करना चाहिए ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बना रहे।
उल्टी के समय शरीर को आराम देना बहुत जरूरी है। अचानक भारी खाना खाने, एक साथ अधिक पानी पीने या तेल-मसाले वाला भोजन करने से बचें। छोटे-छोटे घूंट में पानी, नारियल पानी या हल्का सूप लेना ठीक रहता है। अगर उल्टी लगातार हो रही है, कमजोरी बहुत ज्यादा है, या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
इस तरह उचित देखभाल और हल्के आयुर्वेदिक उपायों से उल्टी की परेशानी को कम किया जा सकता है और शरीर जल्दी स्वस्थ महसूस करता है।
With Inputs From IANS