घटती जन्मदर से चिंतित चीन, महिलाओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील
कभी वन चाइल्ड पॉलिसी को लेकर सख्त रहा चीन अब अपना रुख बदल रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की जा रही है।
कभी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाने वाला चीन अब अपनी नीति में बड़ा बदलाव करता नजर आ रहा है। जहां एक समय देश में “वन चाइल्ड पॉलिसी” को सख्ती से लागू किया गया था, वहीं अब महिलाओं से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील की जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह बदलाव चीन में लगातार गिरती जन्म दर के कारण सामने आया है।
पिछले करीब चार दशकों तक चीन में जन्म दर को व्यक्तिगत पसंद नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों के जरिए नियंत्रित किया गया। 1979 में लागू की गई वन चाइल्ड पॉलिसी का उद्देश्य तेजी से बढ़ती आबादी पर रोक लगाना था। इस नीति के तहत लाखों महिलाओं को अपनी इच्छा के खिलाफ फैसले लेने पड़े। कई मामलों में जबरन गर्भपात, नसबंदी और मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न की घटनाएं भी सामने आईं।
हालांकि, अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में चीन में सिर्फ 7.92 मिलियन शिशुओं का जन्म हुआ, जबकि 2024 में यह संख्या 9.54 मिलियन थी। यानी एक साल में जन्म दर में करीब 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जन्म दर घटकर 1,000 लोगों पर 5.63 रह गई है, जो 1949 के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
इस गिरावट ने सरकार को चिंता में डाल दिया है। पहले 2016 में वन चाइल्ड पॉलिसी को खत्म कर टू-चाइल्ड पॉलिसी लागू की गई और बाद में इसे थ्री-चाइल्ड पॉलिसी तक बढ़ा दिया गया। इसके बावजूद जन्म दर में सुधार नहीं हो पाया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार आज भी बच्चों के जन्म को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बजाय आर्थिक योजना के एक साधन के रूप में देखती है। पहले जहां विकास और संसाधनों पर दबाव कम करने के नाम पर जनसंख्या रोकने की नीति थोप दी गई थी, वहीं अब आर्थिक जरूरतों के चलते ज्यादा बच्चे पैदा करने का दबाव बनाया जा रहा है।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। बढ़ती महंगाई, करियर की अनिश्चितता, कामकाजी महिलाओं के प्रति भेदभाव, बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारियां और जीवनशैली में बदलाव के कारण कई चीनी दंपती ज्यादा बच्चे पैदा करने से हिचक रहे हैं। इसके अलावा, लिंग असंतुलन और बढ़ती उम्र के कारण बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं की संख्या भी घट रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सरकार व्यक्तिगत पसंद, महिलाओं की स्वतंत्रता और सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों को गंभीरता से नहीं लेगी, तब तक सिर्फ नीति बदलने से जनसंख्या संकट का समाधान संभव नहीं है।
With Inputs From IANS