सिस्टिक फाइब्रोसिस और पेट की सूजन, क्यों इस बीमारी में बच्चों का पाचन तंत्र रहता है परेशान? रिसर्च में मिली ये जानकारी
एक शोध के अनुसार, बच्चों के शुरुआती जीवन में मल में मौजूद शॉर्ट चेन फैटी एसिड के स्तर में बदलाव इसका का कारण हो सकता है.
सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic Fibrosis - CF) से पीड़ित बच्चों में अक्सर पेट की समस्याओं और सूजन (Inflammation) की शिकायत बनी रहती है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, बच्चों के शुरुआती जीवन में मल में मौजूद शॉर्ट चेन फैटी एसिड (SCFA) के स्तर में बदलाव इस समस्या का मुख्य कारण हो सकता है. एक स्टडी में 64 सिस्टिक फाइब्रोसिस पीड़ित बच्चों की तुलना स्वस्थ बच्चों से की गई. उनके मल के नमूनों और खान-पान की आदतों का बारीकी से विश्लेषण करने पर कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.
शॉर्ट चेन फैटी एसिड (SCFA) की कमी
शोध में पाया गया कि सिस्टिक फाइब्रोसिस से पीड़ित बच्चों में वैलेरेट (Valerate) और आइसोब्यूटिरेट (Isobutyrate) नामक फैटी एसिड की भारी कमी थी. स्वस्थ बच्चों में उम्र बढ़ने के साथ ब्यूटिरेट और वैलेरेट जैसे एसिड का स्तर बढ़ता है, लेकिन CF पीड़ित बच्चों में यह बढ़ोतरी नहीं देखी गई. इन बच्चों के शरीर में इन महत्वपूर्ण एसिड का स्तर समय के साथ बहुत ज्यादा घटता-बढ़ता रहता है, जो उनके विकास के लिए सही नहीं है.
आहार, माइक्रोबायोम और सूजन का संबंध
अध्ययन ने स्पष्ट किया कि पेट की सूजन का सीधा संबंध हमारे 'गट माइक्रोबायोम' (पेट के बैक्टीरिया) और खान-पान से है. जिन बच्चों में ब्यूटिरेट (Butyrate) का स्तर कम पाया गया, उनमें 'फेकल कैलप्रोटेक्टिन' (पेट की सूजन का संकेत) का स्तर अधिक था. यानी ब्यूटिरेट कम होने पर पेट की सूजन बढ़ जाती है. CF से पीड़ित बच्चों के आहार में फाइबर, साबुत अनाज और रेजिस्टेंट स्टार्च की मात्रा कम पाई गई, जबकि ट्रांस और सैचुरेटेड फैट (हानिकारक वसा) का सेवन अधिक था. फाइबर की कमी के कारण पेट के अच्छे बैक्टीरिया ब्यूटिरेट नहीं बना पाते, जिससे पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
भविष्य की राह और चुनौतियां
हालांकि वैलेरेट और आइसोब्यूटिरेट की भूमिका अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी कमी नैदानिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है. रिसर्चर अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि क्या शुरुआती जीवन में लक्षित पोषण रणनीतियों (Targeted Nutritional Strategies) के जरिए इन फैटी एसिड के स्तर को स्थिर किया जा सकता है