स्वास्थ्य सेवा में भारत-फ्रांस की नई पहल, AIIMS दिल्ली में 'इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर AI' का उद्घाटन, राष्ट्रपति मैक्रों ने दिया खास संदेश

मंगलवार को नई दिल्ली स्थित AIIMS में 'इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर AI इन हेल्थ' का उद्घाटन किया गया है.

Update: 2026-02-19 06:30 GMT

भारत और फ्रांस ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत की है. मंगलवार को नई दिल्ली स्थित AIIMS में 'इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर AI इन हेल्थ' का उद्घाटन किया गया. इस अवसर पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा मौजूद रहे. राष्ट्रपति मैक्रों ने दोनों देशों से "अपना स्वयं का विश्वसनीय AI सिस्टम" बनाने का आह्वान किया ताकि दूसरे देशों की तकनीक पर निर्भरता कम की जा सके।

प्रमुख संस्थानों का अनूठा सहयोग

यह केंद्र AIIMS दिल्ली, सोरबोन यूनिवर्सिटी और पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट के बीच एक संयुक्त समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत स्थापित किया गया है. साझेदार संस्थान, इस पहल में IIT दिल्ली और अन्य फ्रांसीसी संस्थान भी शामिल हैं. इसका लक्ष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, न्यूरोसाइंस (मस्तिष्क विज्ञान) और सार्वजनिक स्वास्थ्य के संगम पर अंतर-विषयक अनुसंधान को बढ़ावा देना है.

मस्तिष्क स्वास्थ्य और क्लिनिकल नवाचार पर जोर

यह केंद्र विशेष रूप से ब्रेन हेल्थ (Brain Health) और वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में AI-संचालित अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा और क्लिनिकल नवाचार पर ध्यान केंद्रित करेगा. राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, "भारत और फ्रांस अपनी कंप्यूटिंग क्षमता और प्रतिभा विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम केवल बाहरी तकनीकों पर भरोसा नहीं कर सकते."

जिम्मेदार और पारदर्शी AI की वकालत

मैक्रों ने जोर देकर कहा कि AI का शासन जिम्मेदारी से होना चाहिए. AI को बच्चों की सुरक्षा और एल्गोरिदम में पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए.एल्गोरिदम में होने वाले भेदभाव को दूर करना जरूरी है. भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने के लिए एक दृढ़ प्रतिबद्धता होनी चाहिए.

शिक्षा और छात्रों के लिए बड़ा ऐलान

इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत और फ्रांस के बीच शैक्षणिक गतिशीलता (Academic Mobility) बढ़ाने की योजना बताई. प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों को फ्रांस में स्वागत करने का लक्ष्य रखा गया है. फ्रांस वीजा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाएगा, विशेष रूप से PhD जैसे लंबे कार्यक्रमों के लिए. मैक्रों ने युवा भारतीय नवाचारकों प्रियंका दास राजकाकती और मनन सूरी के साथ 'RUSH 2026' बैठक के दौरान संवाद भी किया, जहां उन्होंने समावेशी AI इकोसिस्टम बनाने में युवाओं की भूमिका पर चर्चा की.

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