महीने में सिर्फ एक बार पीते हैं ढेर सारी शराब? सावधान, नई स्टडी में खुलासा, लिवर डैमेज का खतरा होता है 3 गुना
एक बार भी ज़्यादा शराब पीने से लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा तीन गुना बढ़ सकता है, रिसर्च में हुआ खुलासा.
शराब का सेवन करने वाले कई बार जब दोस्तों के साथ बैठते हैं तो कितनी बोलत खत्म हो गई पता ही नहीं चला. हालांकि ये कभी-कभी हो सकता है, लेकिन एक स्टडी बताती हैं कि महीने में सिर्फ एक बार भी ज्यादा शराब का सेवन आपके लिए बेहद ही खतरनाक हो सकता है. एक बार भी ज़्यादा शराब पीने से लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा तीन गुना बढ़ सकता है, खासकर अगर आपको मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) जैसी कोई आम बीमारी हो.
कितनी मात्रा में शराब पीना सही?
इसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) भी कहा जाता है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें लोगों के लिवर में फैट जमा हो जाता है, और इसका कारण शराब पीना नहीं होता. गंभीर मामलों में, MASLD की वजह से लिवर में घाव बन सकते हैं, जिसे सिरोसिस कहा जाता है. कुछ लोगों में, MASLD आगे चलकर लिवर कैंसर का रूप भी ले सकता है. Keck Medicine of USC की यह नई स्टडी 'Clinical Gastroenterology and Hepatology' में छपी है. यह स्टडी इस सोच को चुनौती देती है कि शराब को अलग-अलग समय पर पीने से उसका नुकसान कम हो जाता है. यह दिखाती है कि एक ही बार में कई ड्रिंक्स पीने से लिवर पर कितना ज़्यादा बोझ पड़ता है, जिससे सूजन आ जाती है और घाव बन जाते हैं, जिसे फाइब्रोसिस कहते हैं.
लिवर पर क्या होता है असर
Keck Medicine के हेपेटोलॉजिस्ट और लिवर ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट, साथ ही इस स्टडी के मुख्य रिसर्चर डॉ. ब्रायन पी. ली (MD, MAS) कहते हैं, "यह स्टडी एक बहुत बड़ी चेतावनी है. क्योंकि आम तौर पर, डॉक्टर लिवर को होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाते समय इस बात पर ध्यान देते हैं कि कुल कितनी शराब पी गई है, न कि इस बात पर कि उसे कैसे पिया गया है. हमारी रिसर्च बताती है कि लोगों को कभी-कभी ज़्यादा शराब पीने के खतरों के बारे में ज़्यादा जागरूक होने की जरूरत है, और उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए, भले ही वे बाकी समय कम मात्रा में शराब पीते हों.
लिवर फाइब्रोसिस तब होता है जब बार-बार नुकसान पहुंचने की वजह से लिवर में घाव वाले टिशू (scar tissue) बनने लगते हैं, जिससे लिवर कड़ा और कमजोर हो जाता है. लिवर की स्वस्थ कोशिकाएं सख्त घावों में बदल जाती हैं, जो न तो ठीक से काम कर पाती हैं और न ही खुद को ठीक कर पाती हैं. आखिरकार, इससे लिवर की जहरीले पदार्थों को छानने या खुद को दोबारा बनाने की क्षमता कम हो जाती है. अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए और इसका इलाज न किया जाए, तो ये घाव आगे चलकर सिरोसिस, लिवर फेलियर या कैंसर का कारण बन सकते हैं. शुरुआती दौर में आमतौर पर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन जब फाइब्रोसिस बढ़ जाता है, तो थकान, पीलिया, सूजन या पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं.