इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, डेंगू का हो सकता है खतरा

इन लक्षणों को नजरअंदाज करने से डेंगू गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए समय पर पहचान और इलाज जरूरी है।

Update: 2026-03-31 08:00 GMT

नई दिल्ली: डेंगू एक ऐसी बीमारी है जो शुरुआत में सामान्य बुखार जैसी प्रतीत होती है, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर यह गंभीर रूप धारण कर सकती है। यह संक्रमण मच्छरों के काटने से फैलता है।आमतौर पर डेंगू के लक्षण संक्रमण के कुछ दिनों बाद दिखने लगते हैं।

सबसे पहले तेज बुखार आता है, जो अचानक चढ़ता है और कई बार 102-104 डिग्री तक पहुंच जाता है। इसके साथ सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में तेज दर्द, थकान और कमजोरी महसूस होती है। कुछ लोगों के शरीर पर लाल चकत्ते या रैश भी नजर आते हैं। कई बार मरीज को भूख नहीं लगती, जी मिचलाता है और उल्टी भी हो सकती है। इन लक्षणों को लोग अक्सर सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में भारी पड़ सकता है।

डेंगू की सबसे खतरनाक बात यह है कि कुछ मामलों में बुखार कम होने के बाद मरीज की हालत अचानक बिगड़ सकती है। यही वह समय होता है जब शरीर में अंदरूनी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। अगर आपको दिन में तीन या उससे ज्यादा बार उल्टी हो रही है, पेट में तेज दर्द हो रहा है, बहुत ज्यादा बेचैनी या घबराहट महसूस हो रही है या अचानक सुस्ती और कमजोरी बढ़ गई है, तो यह चेतावनी के संकेत हैं। इसके अलावा अगर नाक या मसूड़ों से खून आना शुरू हो जाए, उल्टी में खून आए, मल काला दिखे या पेशाब में खून नजर आए, तो तुरंत अस्पताल जाना बेहद जरूरी है।

कुछ और गंभीर लक्षणों में हाथ-पैर ठंडे और चिपचिपे हो जाना, त्वचा पीली या फीकी लगना, पेशाब कम आना या कई घंटों तक बिल्कुल न आना, सांस लेने में दिक्कत होना और अचानक व्यवहार में बदलाव शामिल हैं। ये सभी संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि शरीर के जरूरी अंगों तक सही मात्रा में खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में देर करना खतरनाक हो सकता है और मरीज को तुरंत मेडिकल देखभाल की जरूरत होती है।

डेंगू में अक्सर प्लेटलेट्स की संख्या कम होने लगती है, लेकिन सिर्फ प्लेटलेट्स के आंकड़े पर ध्यान देना ही काफी नहीं है। कई बार मरीज की हालत प्लेटलेट्स सामान्य होने के बावजूद भी गंभीर हो सकती है, क्योंकि शरीर में पानी की कमी, खून का गाढ़ा होना और प्लाज्मा लीकेज जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

इसलिए अगर बुखार दो दिन से ज्यादा बना रहता है या ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी नजर आता है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। खुद से दवाइयां लेने या घरेलू उपायों पर ही निर्भर रहना सही नहीं है। समय पर इलाज, आराम और शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। (With inputs from IANS)

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