पाद-स्नान: शरीर और मन को ताजगी देने का आसान उपाय, मानसिक थकान कम करे

पूरे दिन के काम की थकान शरीर और मन दोनों पर असर डालती है, जिससे ऊर्जा की कमी महसूस होती है।

Update: 2026-02-03 05:00 GMT

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में दिनभर काम की थकान सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि मन पर भी असर डालती है। लंबे समय तक लगातार काम करने से ऊर्जा की कमी महसूस होती है, मन विचलित रहता है और हल्की सी थकान भी बड़ा बोझ लगने लगती है। ऐसे समय में आयुर्वेद में सुझाया गया पाद-स्नान यानी पैरों को गुनगुने नमक के पानी में भिगोना शरीर और मन दोनों को आराम देने में मदद करता है।

पाद-स्नान एक सरल और असरदार संध्या अभ्यास माना गया है। इसके लिए गुनगुने पानी में सेंधा या समुद्री नमक मिलाकर 10–15 मिनट तक पैरों को भिगोकर केवल श्वास पर ध्यान देना होता है। यह प्रक्रिया शरीर के भारीपन को कम करती है, तनाव को घटाती है और मन को शांत करने में मदद करती है। नियमित पाद-स्नान शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को बेहतर बनाता है, हल्की मांसपेशियों की थकान और दर्द को कम करता है, और नींद को भी गुणकारी बनाता है।

नमक का इस्तेमाल सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि यह शरीर और मन को संतुलित करने में भी मदद करता है। नमक पानी के साथ मिलकर नाड़ियों और तंत्रिकाओं को शांत करता है, जिससे मानसिक तनाव घटता है और मन की बेचैनी कम होती है। इस प्रक्रिया से शरीर हल्का महसूस करता है और मस्तिष्क को विश्राम मिलता है।

आयुर्वेद में पाद-स्नान को छोटे लेकिन प्रभावशाली उपाय के रूप में देखा जाता है। अगर शाम के समय कमजोरी और थकान महसूस हो, तो यह अभ्यास शरीर और मन दोनों को संतुलित करता है। यह मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन के उत्पादन को भी बढ़ाता है और मानसिक एकाग्रता को सुधारता है।

इसलिए, दिनभर की थकान और मानसिक तनाव को कम करने के लिए पाद-स्नान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना फायदेमंद है। यह न केवल शरीर को हल्का और ऊर्जा से भरपूर बनाता है, बल्कि मन को शांत और स्थिर रखता है, जिससे पूरी दिनचर्या और जीवनशैली पर सकारात्मक असर पड़ता है।

With Inputs From IANS

Tags:    

Similar News