फिट रहने के लिए रोज कितने कदम पैदल चलना चाहिए, जानें स्वस्थ जिंदगी का राज

रोज पैदल चलना फिटनेस बढ़ाने और स्वस्थ रहने का सरल उपाय है।

Update: 2026-01-29 05:15 GMT

नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खानपान, बढ़ता प्रदूषण, मौसम में बदलाव और मानसिक तनाव से स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि कुछ सरल आदतों को अपनाकर सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है। इनमें सबसे आसान और प्रभावी उपाय है रोजाना पैदल चलना यानी वॉक करना।

पैदल चलना शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाता है, साथ ही दिल को स्वस्थ रखने और उम्र बढ़ाने में भी सहायक होता है। आयुर्वेद के अनुसार नियमित चलने से शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है, पाचन सुधरता है और तनाव कम होता है। वैज्ञानिक शोध भी बताते हैं कि रोजाना वॉक करने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम घटता है।

वॉकिंग हर उम्र के लोगों के लिए सुरक्षित और सरल व्यायाम है। चलते समय दिल की धड़कन तेज होती है, रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। इससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है, खराब कोलेस्ट्रॉल घटता है और वजन संतुलन में रहता है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी पैदल चलना बेहद लाभकारी है, क्योंकि इससे एंडोर्फिन हार्मोन निकलता है जो तनाव कम करता है और मन को प्रसन्न रखता है।

आयुर्वेद में तेज चलने को प्राणवायु को सक्रिय करने वाला बताया गया है, जिससे शरीर में स्फूर्ति बढ़ती है और रोगों से लड़ने की क्षमता मजबूत होती है। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए विशेषज्ञ रोज कम से कम 30 मिनट की तेज चाल से चलने की सलाह देते हैं।

अमेरिकन हार्ट फाउंडेशन और नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन की रिसर्च के मुताबिक, सप्ताह में पांच दिन रोज करीब 9,000 से 10,000 कदम चलना दिल के लिए आदर्श माना जाता है। इससे रक्त प्रवाह बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल संतुलित रहते हैं। जो लोग शुरुआत कर रहे हैं, उनके लिए 3,800 से 4,000 कदम भी फायदेमंद हो सकते हैं। सबसे जरूरी है नियमितता।

विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्गों के लिए वॉकिंग और भी अधिक लाभकारी है। अध्ययनों में पाया गया है कि 60 वर्ष से ऊपर के लोग यदि रोज 6,000 से 9,000 कदम चलते हैं, तो उनमें दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा 40 से 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

करीब 2.5 से 4 मील तक पैदल चलना दिल को मजबूत बनाता है और कार्डियोवैस्कुलर रोगों से बचाव करता है। आयुर्वेद भी नियमित और संतुलित वॉक को लंबी और स्वस्थ जिंदगी का सरल मंत्र मानता है। (With inputs from IANS)

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