महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर हार्मोन का प्रभाव,PMDD और पेरिमेनोपॉजल डिप्रेशन का सच
दुनिया भर में 'अफेक्टिव डिसऑर्डर' (Affective Disorders) बीमारी के बोझ का एक प्रमुख कारण हैं.
दुनिया भर में 'अफेक्टिव डिसऑर्डर' (Affective Disorders) बीमारी के बोझ का एक प्रमुख कारण हैं. ये न केवल जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं, बल्कि जीवन प्रत्याशा (lifespan) को 10 साल से भी अधिक कम कर सकते हैं. अकेले अमेरिका में, इन विकारों के कारण डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रूप से सालाना 200 बिलियन डॉलर से अधिक का खर्च आता है.
प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर (PMDD)
PMDD, प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) का एक अत्यंत गंभीर रूप है. यह मासिक धर्म चक्र के लुटियल फेज (Luteal Phase) के दौरान होता है. गंभीर अवसाद (Depression), चिंता, एकाग्रता में कमी और अत्यधिक थकान. वर्तमान में PMDD के लिए बहुत कम डायग्नोसिस टेस्ट (Diagnostic Tests) उपलब्ध हैं, जिससे इसकी पहचान मुश्किल हो जाती है.
पेरिमेनोपॉजल डिप्रेशन (Perimenopausal Depression)
यह मूड डिसऑर्डर रजोनिवृत्ति (Menopause) से ठीक पहले के संक्रमण काल में होता है. जिन महिलाओं को पेरिमेनोपॉज़ के दौरान डिप्रेशन होता है, उनमें से कई का पुराना अवसाद का इतिहास रहा है, हालांकि यह सभी के लिए अनिवार्य नहीं है.इसके उपचार में एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं से लेकर **कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT)** तक शामिल हैं।
हार्मोन मैनिपुलेशन प्रोटोकॉल: एक नई रिसर्च
हाल ही में शोधकर्ताओं ने PMDD और पेरिमेनोपॉज़ल डिप्रेशन से पीड़ित महिलाओं पर एक डिटेल्स स्टडी किया गया. इसमें तुलना के लिए एक स्वस्थ (Asymptomatic) समूह को भी शामिल किया गया. महिलाओं के ब्लड के सैंपल से 'लिम्फोब्लास्टॉइड सेल लाइन्स' (प्रयोगशाला में विकसित प्रतिरक्षा कोशिकाएं) तैयार की गईं.
शोधकर्ताओं ने शरीर के अंदर (In vivo) और प्रयोगशाला (In vitro) दोनों स्थितियों में हार्मोन के स्तर को नियंत्रित किया. इसके बाद उनके व्यवहार और जीन एक्सप्रेशन (Gene Expression) का विश्लेषण किया गया. ऐतिहासिक रूप से, इन विकारों को केवल हार्मोन की कमी या अधिकता माना जाता था, और उपचार का मुख्य उद्देश्य हार्मोनल असंतुलन को ठीक करना होता था.