कच्छ में भारतीय सेना के आई कैंप से 200+ मरीजों को नई रोशनी मिली
भुज में भारतीय सेना के सर्जिकल आई कैंप से 200 से ज्यादा लोगों की आंखों की रोशनी लौटी।
गुजरात के भुज स्थित मिलिट्री हॉस्पिटल में भारतीय सेना की ओर से आयोजित तीन दिवसीय सर्जिकल आई कैंप ने सैकड़ों लोगों के जीवन में रोशनी लौटाई है। इस विशेष नेत्र चिकित्सा शिविर के माध्यम से पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और कच्छ जिले के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों सहित 200 से अधिक लोगों की आंखों की रोशनी बहाल की गई।
इस कैंप का आयोजन नई दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) की एक विशेष ऑप्थल्मोलॉजी टीम के सहयोग से किया गया। शिविर के दौरान 2,500 से अधिक मरीजों की आंखों की विस्तृत जांच की गई, जिससे कई लोगों में आंखों से जुड़ी समस्याओं का समय रहते पता चल सका और उनका इलाज शुरू किया गया।
कैंप में की गई उन्नत मोतियाबिंद सर्जरी ने खास तौर पर कच्छ के दूरदराज गांवों में रहने वाले मरीजों को बड़ा लाभ पहुंचाया, जहां आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं। इन सर्जरी के बाद मरीजों की दृष्टि में उल्लेखनीय सुधार देखा गया, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो सकी।
दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने इस नेत्र शिविर का दौरा किया और लाभार्थियों तथा मेडिकल स्टाफ से बातचीत की। उन्होंने कहा कि इस तरह के चिकित्सा शिविर न केवल पूर्व सैनिकों बल्कि स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाते हैं। उन्होंने मेडिकल टीम के पेशेवर रवैये, कौशल और समर्पण की भी सराहना की।
इस सर्जिकल आई कैंप का नेतृत्व ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा ने किया, जो ऑप्थल्मोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट और प्रमुख हैं। उनके नेतृत्व में अब तक एक लाख से अधिक सफल नेत्र सर्जरी की जा चुकी हैं। उनकी टीम ने इस शिविर में जटिल मामलों को भी कुशलता से संभाला।
यह शिविर भारतीय सेना के सीमावर्ती क्षेत्रों में चलाए जा रहे आउटरीच कार्यक्रमों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूर्व सैनिकों के कल्याण के साथ-साथ सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। दूरदराज के इलाकों में आधुनिक जांच और सर्जिकल सुविधाएं उपलब्ध कराकर सेना ने स्थानीय चिकित्सा ढांचे की कमी से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में अहम भूमिका निभाई है।
लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम सीमावर्ती समुदायों के साथ सेना के मजबूत संबंधों को और गहरा करते हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारतीय सेना भविष्य में भी पूर्व सैनिकों और नागरिकों के लिए इस तरह की केंद्रित चिकित्सा और कल्याणकारी पहलें जारी रखेगी।
‘सेवा पहले’ की भावना से प्रेरित भारतीय सेना का यह प्रयास दर्शाता है कि उसकी भूमिका केवल रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समावेशी विकास और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। कच्छ सर्जिकल आई कैंप इसका एक सशक्त उदाहरण है, जिसने जरूरतमंद लोगों तक विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं पहुंचाकर उनकी जिंदगी में नई रोशनी भरी है।
With Inputs From IANS