सिर्फ दौरे ही नहीं, मिर्गी के इन छिपे हुए लक्षणों को पहचानना है बेहद जरूरी: डॉ एन वर्षा मोनिका रेड्डी
मिर्गी के वो लक्षण जिन्हें हम अक्सर नहीं पहचान पाते, शुरुआती लक्षण कुछ और तरीके के होते हैं.
जब भी हम मिर्गी के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में अक्सर शरीर का कांपना या बेहोश होकर गिरना ही आता है. लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में मिर्गी की शुरुआत अक्सर बहुत ही सूक्ष्म और कम ज्ञात लक्षणों से होती है. इन संकेतों को अक्सर व्यवहारिक समस्या या थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि ये दिमाग में होने वाली असामान्य गतिविधियों का शुरुआती संकेत हो सकते हैं.
अचानक टकटकी लगाकर देखना (Staring Spells)
इसे 'एब्सेंस सीजर' (Absence Seizures) कहा जाता है. इसमें बच्चा अचानक शून्य में देखने लगता है और कुछ सेकंड के लिए अनुत्तरदायी (unresponsive) हो जाता है. अक्सर माता-पिता इसे 'दिन में सपने देखना' (Daydreaming) समझकर भूल जाते हैं.
अचानक भ्रम या याददाश्त में कमी
बिना किसी कारण के अचानक उलझन महसूस होना या कुछ पलों के लिए याददाश्त का चले जाना 'फोकल सीजर' का संकेत हो सकता है। वयस्कों में इसे अक्सर बढ़ती उम्र का असर मान लिया जाता है.
अजीब संवेदी अनुभव (Sensory Auras)
क्या आपको कभी अचानक जलते हुए रबर की गंध, कोई अजीब स्वाद या आंखों के सामने अजीब आकृतियां दिखी हैं? ये असल में मस्तिष्क के विशेष हिस्सों से शुरू होने वाले हल्के दौरे हो सकते हैं.
मांसपेशियों में अचानक झटके (Muscle Jerks)
सोकर उठने के तुरंत बाद हाथों या पैरों में अचानक लगने वाले झटके 'मायोक्लोनिक सीजर' हो सकते हैं. लोग इसे अक्सर सामान्य ऐंठन या अनाड़ीपन (Clumsiness) समझ लेते हैं, लेकिन यह गंभीर मिर्गी का रूप ले सकता है.
तीव्र भावनाएं या अचानक घबराहट
बिना किसी वजह के अचानक बहुत डर लगना, चिंता होना या 'डेजा वू' (ऐसा महसूस होना कि सब पहले हो चुका है) का अनुभव होना 'टेम्पोरल लोब एपिलेप्सी' का संकेत हो सकता है. इसे अक्सर पैनिक अटैक समझकर गलत इलाज किया जाता है.
पढ़ाई में गिरावट और नींद की समस्याएं
बच्चों में अचानक से स्कूल के प्रदर्शन का गिरना या सीखने में दिक्कत आना भी मिर्गी का एक लक्षण हो सकता है. इसके अलावा, रात में बिस्तर गीला करना या सोकर उठने पर शरीर पर रहस्यमयी चोट के निशान 'नॉकटर्नल सीजर' (रात के दौरे) की ओर इशारा करते हैं.
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर ऊपर दिए गए लक्षण बार-बार हो रहे हैं, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट (Neurologist) से संपर्क करें. EEG और ब्रेन इमेजिंग जैसी जांचों के जरिए मस्तिष्क की असामान्य गतिविधि को पकड़ा जा सकता है.
समय पर इलाज के फायदे
जल्द पहचान होने पर दवाओं, खान-पान में बदलाव (जैसे कीटोजेनिक डाइट) या कभी-कभी सर्जरी के जरिए मिर्गी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। इससे न केवल दौरे कम होते हैं, बल्कि व्यक्ति का मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है.
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